रियल एस्टेट बिल्डर विवाद: उपभोक्ता फोरम या रेरा कहां केस करें? तुलनात्मक गाइड
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार घर खरीदार एक साथ उपभोक्ता आयोग और रेरा दोनों में जाने के पात्र हैं; त्वरित राहत और हर्जाने के लिए सही मंच का चयन।
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सुप्रीम कोर्ट के अनुसार घर खरीदार एक साथ उपभोक्ता आयोग और रेरा दोनों में जाने के पात्र हैं; त्वरित राहत और हर्जाने के लिए सही मंच का चयन।
रेरा राजस्थान में बिल्डर के खिलाफ धारा 18 के तहत एसबीआई एमसीएलआर + 2% की दर से मासिक ब्याज या मूल राशि मय ब्याज वापस पाने का विधिक दावा।
पॉलिसी जारी होने के 3 वर्ष बाद बीमा कंपनी द्वारा मृत्यु क्लेम खारिज करने पर पूर्ण प्रतिबंध (Section 45 Protection) और नॉमिनी के कानूनी अधिकार।
प्री-एग्जिस्टिंग डिसीज (PED) के झूठे बहाने पर अस्पताल बिल खारिज करने पर उपभोक्ता अदालत से 9% ब्याज और मानसिक संताप का हर्जाना प्राप्त करना।
बीमा कंपनी के रिजेक्शन लेटर के खिलाफ बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) के पास ₹30 लाख तक निशुल्क वाद और उपभोक्ता आयोग में दावा।
30 दिन तक बैंक से समाधान न मिलने पर आरबीआई एकीकृत लोकपाल पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर निशुल्क ऑनलाइन शिकायत और ₹20 लाख तक मुआवजा पाना।
अन्य राज्य की साइबर सेल द्वारा लगाए गए लियन (Lien/Debit Freeze) का कारण जानना, जांच अधिकारी (IO) से संपर्क और हाई कोर्ट से खाता अनफ्रीज कराना।
अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन लेन-देन में बिना ओटीपी पैसा कटने पर बैंक से तत्काल 'Chargeback Request' दर्ज कराना और पुलिस रिपोर्ट संलग्न करना।
एटीएम से पैसा न निकलने पर 5 दिन में स्वतः रिफंड न आने पर ₹100 प्रतिदिन बैंक द्वारा हर्जाना देने का आरबीआई नियम और एटीएम स्किमिंग शिकायत।
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