स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)
शिकागो धर्म संसद भाषण (1893), रामकृष्ण मिशन, युवाओं के प्रेरणास्रोत
एक नज़र में मुख्य तथ्य (Quick Facts)
अनमोल विचार एवं प्रसिद्ध कथन
"उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।"
— स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)"आप तब तक ईश्वर पर विश्वास नहीं कर सकते जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते।"
— स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)"जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी।"
— स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)अंत में दक्षिणेश्वर के संत रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें उत्तर दिया—'हाँ नरेंद्र! मैंने ईश्वर को देखा है, उतनी ही स्पष्टता से जितनी स्पष्टता से मैं तुम्हें देख रहा हूँ।' इसके बाद नरेंद्र ने परमहंस जी को अपना गुरु स्वीकार किया और स्वामी विवेकानंद के नाम से सन्यास धारण किया।
11 सितम्बर 1893 को अमेरिका के शिकागो में आयोजित 'विश्व धर्म महासभा' में जब विवेकानंद जी ने अपने भाषण की शुरुआत 'अमेरिका के मेरे भाइयो और बहनो!' (Sisters and Brothers of America!) शब्दों से की, तो पूरा सभागार दो मिनट तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूँजता रहा। उन्होंने विश्व को सहिष्णुता, वेदांत और सार्वभौमिक बंधुत्व का संदेश दिया।
भारत लौटकर उन्होंने दरिद्र नारायण की सेवा हेतु 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की। उनका जन्मदिन (12 जनवरी) प्रतिवर्ष भारत में 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) - सामान्य ज्ञान क्विज़ (Quiz)
आपने इस जीवनी से क्या सीखा? नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर पर क्लिक करें और अपनी जानकारी परखें:
1 स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम क्या था?
2 शिकागो धर्म महासभा किस वर्ष आयोजित हुई थी?
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