राजस्थान कानूनी अधिकार एवं
नागरिक विधिक सहायता पोर्टल
जमीन-जायदाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), किराया कानून, वैवाहिक विवाद, उपभोक्ता संरक्षण, साइबर फ्रॉड, पुलिस एफआईआर और वरिष्ठ नागरिकों के 100 महत्वपूर्ण कानूनी अधिकारों की संपूर्ण, सरल व प्रामाणिक जानकारी।
क्या आपका कोई कानूनी विवाद है?
जमीन, वसीयत, चेक बाउंस, पुलिस केस, तलाक या पारिवारिक विवाद में सीधे हाई कोर्ट के अधिवक्ता से परामर्श लें।
WhatsApp पर संपर्क करेंपुलिस थाने बुलाए जाने पर आपके कानूनी अधिकार: पूछताछ, नोटिस व वकील की मौजूदगी
धारा 35 बीएनएसएस (पूर्व 41A सीआरपीसी) नोटिस, बिना नोटिस थाने बैठाने पर रोक, महिलाओं व 15 वर्ष से कम बच्चों से केवल निवास स्थान पर पूछताछ नियम।
पुलिस वेरिफिकेशन की कानूनी प्रक्रिया: नौकरी, पासपोर्ट व किराएदार सत्यापन नियम
राजस्थान पुलिस पोर्टल से चरित्र प्रमाण पत्र (Character Certificate) आवेदन, स्थानीय थाने द्वारा आपराधिक रिकॉर्ड जांच और रिपोर्ट प्रेषण।
अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के बाद क्या होता है? संज्ञान, आरोप तय व ट्रायल प्रक्रिया
मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान (Cognizance), दस्तावेजों की आपूर्ति, आरोप विरचन (Framing of Charges), अभियोजन साक्ष्य और बचाव पक्ष की जिरह।
चार्जशीट (आरोप पत्र) क्या है? पुलिस जांच के बाद अदालत में चालान पेश करने के नियम
धारा 193 बीएनएसएस (पूर्व 173 सीआरपीसी) के तहत 60 या 90 दिन में चार्जशीट, गवाहों के बयान, फोरेंसिक साक्ष्य और डिफॉल्ट बेल (Default Bail) का अधिकार।
दर्ज एफआईआर की प्रमाणित कॉपी कैसे प्राप्त करें: थाने से या ऑनलाइन डाउनलोड नियम
पीड़ित को निशुल्क एफआईआर कॉपी पाने का अधिकार, राजस्थान पुलिस सिटीजन पोर्टल से ई-कॉपी डाउनलोड और आरोपी को कोर्ट से चालान कॉपी प्राप्ति।
एफआईआर निरस्त (FIR Cancellation/FR) क्या होती है? फाइनल रिपोर्ट की कानूनी प्रक्रिया
पुलिस द्वारा पेश एफआर (FR/Final Report), प्रोटेस्ट पिटीशन (Protest Petition) और हाई कोर्ट में धारा 528 बीएनएसएस (पूर्व 482 सीआरपीसी) में क्वैशिंग।
क्या दूसरे शहर या राज्य में घटित अपराध की FIR अपने शहर में दर्ज करा सकते हैं?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(1) के तहत क्षेत्राधिकार से बाहर प्राथमिकी दर्ज कराने की बाध्यता और पुलिस के इनकार पर कानूनी उपाय।
ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) क्या है? किसी भी थाने में अपराध दर्ज कराने का नागरिक अधिकार
घटनास्थल के क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना देश के किसी भी पुलिस थाने में अपराध दर्ज कराने का अधिकार और संबंधित थाने को केस ट्रांसफर नियम।
FIR और पुलिस शिकायत (Complaint) में क्या अंतर है? कानूनी बारीकियां (FIR vs Police Complaint: What's the Difference?)
संज्ञेय (Cognizable) बनाम असंज्ञेय (Non-cognizable) अपराध, एफआईआर दर्ज करने की बाध्यता और केवल शिकायत पत्र में अंतर।
राजस्थान में पुलिस थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने का सही तरीका (How to File an FIR in Rajasthan)
घटना का सही विवरण, समय, स्थान, गवाहों के नाम और निशुल्क एफआईआर की प्रति (Free Copy of FIR) प्राप्त करने का कानूनी अधिकार।
यदि पुलिस थाना आपकी FIR दर्ज न करे तो क्या करें? धारा 156(3) व SP को आवेदन (What to Do If Police Refuse to Register Your Complaint?)
थानाधिकारी द्वारा एफआईआर न लिखने पर पुलिस अधीक्षक (SP) को डाक से शिकायत और मजिस्ट्रेट कोर्ट में 156(3) CrPC/BNSS के तहत एफआईआर का आदेश।
राजस्थान पुलिस पोर्टल व RajCop ऐप पर ऑनलाइन ई-एफआईआर कैसे दर्ज करें? (Can You File a Police Complaint Online in Rajasthan?)
चोरी, गुमशुदगी और गैर-संज्ञेय मामलों में घर बैठे ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज कराने और रसीद प्राप्त करने की संपूर्ण गाइड।