RTI द्वितीय अपील (Second Appeal) का परिचय: आम आदमी का अंतिम हथियार

प्रस्तावना

जब सूचना का अधिकार (RTI) कानून 2005 में लागू हुआ, तो इसका उद्देश्य भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना और सरकारी जवाबदेही तय करना था। लेकिन असलियत में, कई बार जन सूचना अधिकारी (PIO) जानकारी देने से बचते हैं। जब आपकी ‘प्रथम अपील’ भी फेल हो जाती है, तब द्वितीय अपील ही वह रास्ता है जो बड़े-बड़े अधिकारियों को हिला सकता है।

द्वितीय अपील की कानूनी शक्ति

सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(3) के तहत द्वितीय अपील का प्रावधान है। यह केवल एक कागज़ का टुकड़ा नहीं है, बल्कि एक कानूनी प्रक्रिया है जिसमें:

  1. स्वतंत्र आयोग की भूमिका: सूचना आयोग (Information Commission) किसी विभाग के अधीन नहीं होता। यह एक स्वतंत्र संस्था है।

  2. दबाव की शक्ति: आयोग के पास समन भेजने और गवाही लेने की वैधानिक शक्तियाँ होती हैं।

  3. दंड का डर: अधिकारियों को सबसे ज्यादा डर इसी बात का होता है कि आयोग उनकी सर्विस बुक में ‘जुर्माने’ की एंट्री करवा सकता है।

आपको द्वितीय अपील कब करनी चाहिए? (Grounds)

  • जब प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) ने 45 दिनों के भीतर कोई आदेश पारित न किया हो।

  • जब FAA का आदेश भ्रामक या पक्षपाती लगे।

  • जब जानकारी देने के बजाय आपको डराया-धमकाया गया हो।


 केंद्रीय बनाम राज्य सूचना आयोग (CIC vs SIC) – सही पता कैसे चुनें?

अक्सर लोग यही गलती करते हैं कि वे गलत आयोग को अपनी अपील भेज देते हैं, जिससे उनका कीमती समय बर्बाद होता है।

1. केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission – CIC)

अगर आपका मामला केंद्र सरकार के विभागों से जुड़ा है, तो आप CIC (नई दिल्ली) में अपील करेंगे।

  • उदाहरण: बैंक (SBI, PNB आदि), रेलवे, डाक विभाग, आयकर विभाग (Income Tax), रक्षा मंत्रालय, पासपोर्ट ऑफिस।

  • वेबसाइट: cic.gov.in (यहाँ ऑनलाइन अपील की सुविधा उपलब्ध है)।

2. राज्य सूचना आयोग (State Information Commission – SIC)

अगर मामला राज्य सरकार के नियंत्रण वाले विभागों का है, तो आप अपने राज्य के सूचना आयोग में अपील करेंगे।

  • उदाहरण: ग्राम पंचायत, नगरपालिका, राज्य पुलिस, तहसील/एसडीएम ऑफिस, राज्य बिजली बोर्ड, राशन की दुकान।

  • पता: हर राज्य की राजधानी (जैसे लखनऊ, पटना, जयपुर) में इनका मुख्यालय होता है।

आयोग चुनने की “प्रो-टिप” (Pro-Tip)

हमेशा अपने ऑरिजनल RTI आवेदन को देखें। यदि वहां ‘PIO’ केंद्र का है, तो CIC जाएं। यदि राज्य का है, तो SIC जाएं। गलत पते पर भेजी गई अपील बिना सुनवाई के खारिज की जा सकती है।

 90 दिनों का गणित – समय सीमा (Timeline) और देरी का समाधान

RTI कानून में ‘समय’ ही सब कुछ है। अगर आप समय से चूक गए, तो आपका केस कमज़ोर हो सकता है।

अपील फाइल करने का सही समय

कानून के अनुसार, प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) के निर्णय की प्राप्ति के 90 दिनों के भीतर आपको द्वितीय अपील फाइल करनी चाहिए।

  • केस A: यदि FAA ने आदेश दिया है, तो उस तारीख से 90 दिन गिनें।

  • केस B: यदि FAA ने कोई जवाब नहीं दिया (Deemed Refusal), तो प्रथम अपील फाइल करने के 45 दिन खत्म होने के बाद अगले 90 दिनों के भीतर आप अपील कर सकते हैं।

क्या 90 दिन बीत जाने के बाद अपील हो सकती है? (Section 19(3) Proviso)

हाँ, इसे “Condonation of Delay” कहते हैं। यदि आपके पास देरी का कोई ठोस कारण है (जैसे बीमारी, दुर्घटना या कोई पारिवारिक आपदा), तो आप आयोग से निवेदन कर सकते हैं।

  • कैसे करें? आपको अपनी अपील के साथ एक अलग से ‘माफीनामा’ (Affidavit) लगाना होगा जिसमें देरी का कारण विस्तार से बताया गया हो। यदि कमिश्नर संतुष्ट होते हैं, तो वे आपकी अपील स्वीकार कर लेंगे।


केंद्रीय बनाम राज्य सूचना आयोग (CIC vs SIC) — सही चयन कैसे करें?

अनुमानित शब्द संख्या: 1200 – 1500 शब्द

RTI कानून में सफलता की पहली सीढ़ी यह पहचानना है कि आपका मामला किस सरकार के अधीन आता है। भारत एक संघीय ढांचा (Federal Structure) है, जहाँ शक्तियाँ केंद्र और राज्य के बीच बंटी हुई हैं। यही बंटवारा सूचना आयोगों में भी दिखता है।

1. केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission – CIC)

यदि आपकी जानकारी का संबंध केंद्र सरकार के किसी भी मंत्रालय, विभाग या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) से है, तो आपकी द्वितीय अपील नई दिल्ली स्थित CIC में जाएगी।

प्रमुख विभाग जो CIC के अंतर्गत आते हैं:

  • बैंकिंग और बीमा: SBI, PNB, LIC, RBI आदि।

  • परिवहन: भारतीय रेलवे, एयर इंडिया, नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI)।

  • रक्षा और सुरक्षा: थल सेना, नौसेना, वायु सेना, दिल्ली पुलिस (याद रखें, दिल्ली पुलिस केंद्र के अधीन है)।

  • अन्य: डाक विभाग (Post Office), आयकर विभाग, पासपोर्ट सेवा, सीबीएसई (CBSE), केंद्रीय विश्वविद्यालय (जैसे DU, JNU)।

2. राज्य सूचना आयोग (State Information Commission – SIC)

यदि आपकी जानकारी राज्य सरकार के नियंत्रण वाले किसी विभाग से जुड़ी है, तो आप अपने संबंधित राज्य के सूचना आयोग में अपील करेंगे। हर राज्य का अपना एक अलग आयोग होता है।

प्रमुख विभाग जो SIC के अंतर्गत आते हैं:

  • स्थानीय प्रशासन: ग्राम पंचायत, नगरपालिका, नगर निगम, जिला परिषद।

  • कानून व्यवस्था: राज्य पुलिस (जैसे यूपी पुलिस, बिहार पुलिस आदि)।

  • राजस्व और भूमि: तहसील, एसडीएम कार्यालय, भूमि रिकॉर्ड विभाग।

  • शिक्षा और स्वास्थ्य: राज्य के सरकारी स्कूल, सरकारी अस्पताल, राज्य बिजली बोर्ड।


सही आयोग की पहचान कैसे करें? (The Golden Rule)

अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं कि विभाग राज्य का है या केंद्र का। इसे पहचानने का सबसे आसान तरीका है आपका ‘मूल RTI आवेदन’ (Original RTI Application)

  1. PIO का पद देखें: यदि आपने ‘केंद्रीय जन सूचना अधिकारी’ (CPIO) को पत्र लिखा था, तो मामला CIC का है।

  2. SPIO का पद देखें: यदि आपने ‘राज्य जन सूचना अधिकारी’ (SPIO) को पत्र लिखा था, तो मामला SIC का है।

चेतावनी: यदि आपने उत्तर प्रदेश के किसी मामले की अपील गलती से दिल्ली (CIC) भेज दी, तो CIC उसे स्वीकार नहीं करेगा और आपको वापस भेज देगा। इसमें आपके 2-3 महीने बर्बाद हो सकते हैं।


आयोगों की कार्यप्रणाली में अंतर

विशेषता केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) राज्य सूचना आयोग (SIC)
मुख्यालय नई दिल्ली राज्य की राजधानी (जैसे लखनऊ, पटना)
अपील का तरीका ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों अधिकतर ऑफलाइन (कुछ राज्यों में ऑनलाइन शुरू)
भाषा हिंदी और अंग्रेजी हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषा
सुनवाई अक्सर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा व्यक्तिगत उपस्थिति या वीडियो कॉल

 

क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) से जुड़े जटिल मामले

कुछ मामले ऐसे होते हैं जहाँ उलझन बढ़ जाती है। आइए उन्हें विस्तार से समझते हैं:

  • निजी बैंक और संस्थान: यदि कोई संस्थान सरकार से भारी फंडिंग लेता है, तो वह RTI के दायरे में आता है। ऐसे मामलों में फंडिंग का स्रोत देखें (केंद्र या राज्य)।

  • दिल्ली पुलिस का मामला: चूँकि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, यहाँ की पुलिस केंद्र के अधीन आती है, इसलिए इसकी अपील CIC में होगी, न कि किसी राज्य आयोग में।

  • पंचायत चुनाव: गाँव के विकास कार्यों की जानकारी के लिए हमेशा राज्य सूचना आयोग (SIC) ही सही जगह है।

90 दिनों का गणित — समय सीमा (Timeline) और देरी का समाधान

RTI कानून में ‘समय’ ही सबसे बड़ा बल है। यदि आप सही समय पर कदम नहीं उठाते, तो कानून आपकी मदद नहीं कर पाता। द्वितीय अपील के लिए धारा 19(3) में स्पष्ट समय सीमा दी गई है।

1. अपील फाइल करने की समय सीमा क्या है?

कानून के अनुसार, आपको प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) के निर्णय प्राप्त होने की तारीख से 90 दिनों के भीतर अपनी द्वितीय अपील सूचना आयोग को भेज देनी चाहिए।

यहाँ दो स्थितियाँ हो सकती हैं:

  • स्थिति अ (जब आदेश मिला हो): जिस दिन आपको प्रथम अपीलीय अधिकारी का लिखित आदेश (Order) मिला, उस दिन से 90 दिन गिनें।

  • स्थिति ब (जब आदेश न मिला हो – Deemed Refusal): यदि आपने प्रथम अपील की और 45 दिन बीत जाने के बाद भी अधिकारी ने कोई जवाब नहीं दिया, तो उन 45 दिनों के खत्म होते ही अगले 90 दिनों के भीतर आप द्वितीय अपील कर सकते हैं।

2. क्या 90 दिन बीत जाने के बाद भी अपील संभव है? (Condonation of Delay)

RTI अधिनियम की धारा 19(3) में एक विशेष प्रावधान (Proviso) है। यदि अपीलकर्ता (आप) यह साबित कर दे कि उसके पास अपील न कर पाने का “पर्याप्त कारण” (Sufficient Cause) था, तो सूचना आयोग 90 दिन के बाद भी अपील स्वीकार कर सकता है।

स्वीकार्य कारण क्या हो सकते हैं?

  • गंभीर बीमारी (डॉक्टर के पर्चे के साथ)।

  • परिवार में किसी की मृत्यु या गंभीर दुर्घटना।

  • सरकारी विभाग द्वारा गुमराह किया जाना।

  • डाक सेवा में अत्यधिक देरी।

कैसे करें आवेदन? आपको अपनी अपील के साथ एक “विलंब माफी पत्र” (Condonation of Delay Application) लगाना होगा। इसमें स्पष्ट लिखें: “महोदय, मैं अमुक कारणों से समय पर अपील नहीं कर सका, कृपया न्याय के हित में मेरी अपील स्वीकार करें।”


 4: अपील के ठोस आधार — किन परिस्थितियों में आयोग जाना चाहिए?

केवल “मैं संतुष्ट नहीं हूँ” लिखना काफी नहीं है। सूचना आयोग में आपकी जीत इस बात पर निर्भर करती है कि आपने किन आधारों (Grounds) पर अपील की है।

प्रमुख आधार (Grounds for Appeal):

  1. जानकारी देने से मना करना (Refusal): अधिकारी ने बिना किसी ठोस कानूनी कारण (जैसे धारा 8 या 9) के जानकारी देने से मना कर दिया हो।

  2. भ्रामक या गलत जानकारी (Misleading Info): आपको जो कागज दिए गए, वे अधूरे हैं या उनमें दी गई जानकारी जमीनी हकीकत से अलग है।

  3. अत्यधिक शुल्क की मांग (Exorbitant Fees): यदि 30 दिन की समय सीमा बीत चुकी है, तो जानकारी मुफ्त मिलनी चाहिए। यदि अधिकारी फिर भी पैसे मांग रहा है, तो यह अपील का मजबूत आधार है।

  4. प्रथम अपीलीय अधिकारी की निष्क्रियता: यदि प्रथम अपीलीय अधिकारी ने आपकी बात सुने बिना या बिना जांच किए जन सूचना अधिकारी (PIO) का पक्ष लिया है।

  5. अपूर्ण रिकॉर्ड (Incomplete Records): विभाग यह कह रहा है कि “फाइल गुम हो गई है” या “रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है”। यह आयोग जाने का सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि रिकॉर्ड सुरक्षित रखना विभाग की जिम्मेदारी है।

दस्तावेज़ों की चेकलिस्ट — क्या-क्या साथ लगाना ज़रूरी है?

सूचना आयोग में आपकी अपील सिर्फ आपकी बातों पर नहीं, बल्कि आपके दस्तावेज़ों (Evidence) पर टिकी होती है। यदि एक भी ज़रूरी कागज़ छूट गया, तो आयोग आपकी अपील को “त्रुटिपूर्ण” (Defective) मानकर वापस भेज देगा।

द्वितीय अपील के लिए अनिवार्य दस्तावेज़ (The Checklist):

  1. मूल RTI आवेदन (Original RTI Application): जो सबसे पहले आपने जन सूचना अधिकारी (PIO) को भेजा था।

  2. डाक की रसीद (Post Receipt/Speed Post): यह साबित करने के लिए कि आपने आवेदन सही तारीख पर भेजा था।

  3. PIO का जवाब (यदि मिला हो): जन सूचना अधिकारी ने जो भी पत्र आपको भेजा, उसकी फोटोकॉपी।

  4. प्रथम अपील की प्रति (Copy of First Appeal): जो आपने प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) को भेजी थी।

  5. प्रथम अपीलीय अधिकारी का आदेश (FAA Order): यदि उन्होंने कोई फैसला सुनाया है।

  6. पहचान पत्र (Identity Proof): आधार कार्ड या वोटर आईडी की कॉपी।

  7. इंडेक्स (Index): सभी कागज़ातों की एक सूची, जिसमें लिखा हो कि कौन सा दस्तावेज़ किस पेज नंबर पर है।

प्रो-टिप: “Self-Attestation” का महत्व

आयोग को भेजे जाने वाले हर दस्तावेज़ की फोटोकॉपी पर अपने हस्ताक्षर (Sign) ज़रूर करें और उस पर “सत्यापित” (Attested) लिखें। बिना हस्ताक्षर के कागज़ातों को अक्सर स्वीकार नहीं किया जाता।


ड्राफ्टिंग मास्टरक्लास — अपील का फॉर्मेट और लिखने का सही तरीका

अपील लिखना एक कला है। आपकी भाषा न तो बहुत कमज़ोर होनी चाहिए और न ही बहुत आक्रामक। आपको तथ्यों (Facts) पर बात करनी चाहिए।

अपील का ढांचा (Structure):

  1. विषय (Subject): स्पष्ट लिखें — “सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 19(3) के तहत द्वितीय अपील।”

  2. केस का संक्षिप्त विवरण (Brief Facts): यहाँ कहानी की तरह लिखें — “मैंने दिनांक XX को जानकारी मांगी, अधिकारी ने गलत जानकारी दी, फिर मैंने प्रथम अपील की…”

  3. अपील के आधार (Grounds): यहाँ कानून की भाषा का उपयोग करें। जैसे: “अधिकारी ने धारा 8 का गलत हवाला देकर जानकारी छिपाई है।”

  4. प्रार्थना (Prayer/Relief): यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है। यहाँ आप आयोग से मांग करते हैं:

    • मुझे जानकारी मुफ्त दिलाई जाए।

    • अधिकारी पर धारा 20 के तहत जुर्माना लगाया जाए।

    • मुझे मानसिक परेशानी के लिए मुआवज़ा दिया जाए।

महत्वपूर्ण सूचना: यदि आप स्वयं ये सब टाइप नहीं करना चाहते, तो आप हमारे [RTI Generator Tool] का उपयोग कर सकते हैं। बस अपनी जानकारी भरें और एक प्रोफेशनल अपील लेटर तैयार पाएं!


ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन फाइलिंग — कौन सा तरीका बेहतर है?

आज के डिजिटल युग में आपके पास दो विकल्प हैं।

1. ऑनलाइन फाइलिंग (Online Filing)

  • केंद्रीय सूचना आयोग (CIC): इनकी वेबसाइट rtionline.gov.in पर जाकर आप घर बैठे अपील कर सकते हैं।

  • फायदे: कागज़ात खोने का डर नहीं, स्टेटस ट्रैक करना आसान है, और डाक का खर्चा बचता है।

2. ऑफलाइन फाइलिंग (Registered/Speed Post)

  • राज्य आयोग (SIC): उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे कई राज्यों में अभी भी डाक द्वारा ही अपील स्वीकार की जाती है।

  • सावधानी: हमेशा ‘Registered Post’ या ‘Speed Post’ का ही उपयोग करें। साधारण डाक (Ordinary Post) से कभी अपील न भेजें।

    प्रमाणित प्रतियों (Certified Copies) का महत्व और उन्हें प्राप्त करना

    जब आप द्वितीय अपील सूचना आयोग (Information Commission) को भेजते हैं, तो आयोग आपसे “सत्यापित” या “प्रमाणित” प्रतियों की मांग करता है। साधारण फोटोकॉपी और प्रमाणित प्रति में कानूनी रूप से बहुत बड़ा अंतर होता है।

    1. प्रमाणित प्रति (Certified Copy) क्या है?

    RTI अधिनियम की धारा 2(j)(ii) के तहत, नागरिक को यह अधिकार है कि वह रिकॉर्ड्स की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त कर सके। इसका मतलब है कि अधिकारी उस कागज़ पर अपनी मोहर लगाएगा और हस्ताक्षर करेगा कि “यह मूल रिकॉर्ड की सही प्रति है।”

    2. अपील के साथ कौन से दस्तावेज़ ‘प्रमाणित’ होने चाहिए?

    जब आप द्वितीय अपील फाइल करते हैं, तो निम्नलिखित कागज़ातों का सेट तैयार करें:

    • प्रथम अपील का आदेश: यदि प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) ने आपको कोई लिखित आदेश भेजा है, तो उसकी मूल प्रति या प्रमाणित फोटोकॉपी।

    • PIO का जवाब: जन सूचना अधिकारी ने जो पत्र आपको भेजा था।

    • आपका शपथ पत्र (Affidavit): कई राज्य आयोग (जैसे उत्तर प्रदेश या राजस्थान) यह मांग करते हैं कि आप एक ₹10 के स्टैम्प पेपर पर शपथ पत्र दें कि आपके द्वारा दी गई जानकारी सत्य है।

    3. “Self-Attestation” बनाम “Certified Copy”

    • Self-Attested: जब आप खुद अपने हस्ताक्षर किसी फोटोकॉपी पर करते हैं। सूचना आयोग में अपनी अपील भेजते समय आपको हर पन्ने पर स्व-प्रमाणित (Self-Attested) हस्ताक्षर करने अनिवार्य हैं।

    • Certified by Dept: जब विभाग अपनी मोहर लगाता है। अपील में सबूत के तौर पर विभाग द्वारा दी गई मोहर वाली कॉपियाँ ही लगाएं।

    चेतावनी: यदि आपके दस्तावेज़ स्पष्ट (Clear) नहीं हैं या उन पर आपके हस्ताक्षर नहीं हैं, तो आयोग आपकी फाइल को “Defective” (त्रुटिपूर्ण) घोषित कर देगा और आपकी सुनवाई नहीं होगी।

     आयोग में सुनवाई (Hearing) — अपनी बात कैसे रखें?

    अपील दर्ज होने के कुछ महीनों बाद (या साल भर बाद), आपको आयोग से एक “सुनवाई का नोटिस” (Notice of Hearing) प्राप्त होगा। यह आपके लिए सबसे बड़ा मौका है।

    1. सुनवाई के प्रकार

    आजकल सूचना आयोग तीन तरीकों से सुनवाई करते हैं:

    • व्यक्तिगत उपस्थिति (Personal Appearance): आपको आयोग के कार्यालय (जैसे दिल्ली या लखनऊ) जाना होगा।

    • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing – VC): आप अपने जिले के ‘NIC केंद्र’ (कलेक्ट्रेट ऑफिस) जाकर टीवी स्क्रीन के माध्यम से कमिश्नर से बात करते हैं।

    • ऑडियो/फ़ोन सुनवाई: कुछ विशेष परिस्थितियों में कमिश्नर फोन पर भी आपकी बात सुनते हैं।

    2. सुनवाई के दौरान क्या कहें? (How to Argue)

    कमिश्नर के सामने आपको बहुत लंबा भाषण देने की ज़रूरत नहीं है। इन 3 बिंदुओं पर बात करें:

    1. तथ्य: “मैंने इस तारीख को आवेदन किया था, लेकिन मुझे जानकारी नहीं मिली।”

    2. कानून: “अधिकारी ने धारा 7(1) का उल्लंघन किया है और 30 दिन में जवाब नहीं दिया।”

    3. मांग: “महोदय, अधिकारी पर जुर्माना लगाया जाए और मुझे जानकारी मुफ्त दिलाई जाए।”

    3. यदि आप सुनवाई में नहीं जा सकते?

    यदि आप बीमार हैं या किसी कारण से नहीं जा सकते, तो आप अपनी तरफ से किसी प्रतिनिधि (Representative) को भेज सकते हैं। इसके लिए आपको एक ‘Authorization Letter’ (प्राधिकरण पत्र) देना होगा। यदि कोई भी नहीं जा पाता, तो भी कमिश्नर आपके द्वारा भेजे गए कागज़ों के आधार पर फैसला सुना सकते हैं।

    RTI Generator — तकनीक और कानून का संगम

    पुराने ज़माने में RTI लिखने के लिए कागज़-कलम लेकर घंटों बैठना पड़ता था, या फिर किसी वकील को पैसे देकर ड्राफ्ट बनवाना पड़ता था। लेकिन अब shayarimanch.com/rti-generator/ ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और ऑटोमैटिक बना दिया है।

    1. RTI Generator क्या है?

    यह एक इंटेलिजेंट वेब टूल है जो RTI अधिनियम 2005 के सभी कानूनी मानकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह आपसे कुछ बुनियादी सवाल पूछता है और बदले में आपको एक प्रोफेशनल कानूनी ड्राफ्ट तैयार करके देता है।

    2. RTI Generator की 5 बड़ी खूबियां:

    • समय की बचत: हाथ से लिखने में 30 मिनट लगते हैं, जबकि इस जनरेटर से मात्र 2 मिनट में काम हो जाता है।

    • गलतियों की गुंजाइश खत्म: जनरेटर में पहले से ही “सेवा में, जन सूचना अधिकारी” और “विषय: सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन” जैसे शब्द फिक्स होते हैं, जिससे आप तकनीकी गलती नहीं करते।

    • Transliteration तकनीक: अगर आपको हिंदी टाइपिंग नहीं आती, तो डरने की ज़रूरत नहीं। आप इंग्लिश कीबोर्ड से ‘Nifty 50’ या ‘Panchayat’ टाइप करेंगे और यह उसे अपने आप हिंदी में बदल देगा।

    • डायनामिक प्रश्न (Dynamic Points): आप “+” बटन दबाकर जितने चाहें उतने सवाल जोड़ सकते हैं, और जनरेटर उन्हें नंबर के हिसाब से (1, 2, 3…) सेट कर देगा।

    • Preview & Edit: फाइल डाउनलोड करने से पहले आप देख सकते हैं कि आपकी RTI कैसी दिख रही है।

    3. RTI Generator का उपयोग कब और कहाँ करें?

    • ग्राम पंचायत के कामों के लिए: “मेरे गाँव के स्कूल में कितना पैसा आया?” – इसका ड्राफ्ट यहाँ बनाएं।

    • सरकारी नौकरी/रिजल्ट के लिए: “परीक्षा की कट-ऑफ और मेरी कॉपी की फोटोकॉपी चाहिए।” – इसका आवेदन यहाँ तैयार करें।

    • पेंशन या राशन कार्ड के लिए: “मेरी बुढ़ापा पेंशन क्यों रुकी हुई है?” – इसके लिए सटीक लेटर यहाँ से जेनरेट करें।


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