चुनावी शायरी
चुनावी शायरी
चुनावी शायरी
यह स्याही का निशान महज़ एक दाग़ नहीं है, यह तो जम्हूरियत के जलते हुए चिराग़ की लौ है। बदल सकती है जो हुक़ूमत के बड़े-बड़े तकब्बुर को, यह आम इंसान के अंदर छुपी हुई ताक़त की लौ है।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
नफ़रत फैलाकर जो सत्ता हासिल करते हैं, वो कभी मुल्क का सच्चा भला नहीं कर सकते। जो जोड़ते हैं दिलों को और करते हैं तरक़्क़ी, वही मुस्तक़बिल को रौशन-ओ-फ़िज़ा कर सकते हैं।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
तख़्त-ओ-ताज की गरमी में ये भूल मत जाना, अवाम ही बनाती है, अवाम ही गिराती है। जब जागती है सोई हुई ग़ैरत जनता की, तो बड़े-बड़े सियासतदानों को ज़मीन पर ला पटकती है।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
लोकतंत्र का ये पर्व है, इसे बेकार मत जाने दो, सही नेता चुनो, देश को आगे बढ़ने दो।
— Admin
चुनावी शायरी
लोकतंत्र का ये पर्व है, इसे बेकार मत जाने दो, सही नेता चुनो, देश को आगे बढ़ने दो।
— Admin