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दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी
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दर्द और तन्हाई शायरी
ज़ख्म इतने गहरे हैं कि दिखाए नहीं जाते, आँसू भी आँखों में अब छुपाए नहीं जाते, कैसी कशमकश में डाल दिया है ज़िंदगी ने, कि अब तो हँसते हुए भी दिन बिताए नहीं जाते।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
एक उम्मीद की शम'अ जलाई थी हमने, वही हवा का झोंका उसे बुझा गया, जिसके सहारे जीना सीखा था हमने, वही शख्स हमें जिंदा लाश बना गया।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
मोहब्बत का सिला कुछ इस तरह मिला हमें, कि खुद को खो दिया उन्हें पाने की चाह में, अब वो पूछते हैं कि उदास क्यों रहते हो, कोई पूछे उनसे कि ज़ख्म किसने दिए राह में।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
साँसों का चलना भी अब एक सज़ा सा लगता है, ये दिल धड़कने पर भी बेवफा सा लगता है, न जाने किस मोड़ पर ले आई है ये ज़िंदगी, कि खुद का वजूद भी अब पराया सा लगता है।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
चेहरे पर झूठी मुस्कान सजाना सीख लिया है, भीड़ में भी तन्हाई को छुपाना सीख लिया है, अब कोई नहीं पूछता कि हाल क्या है मेरा, क्योंकि हमने भी हर सवाल पर मुस्कुराना सीख लिया है।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
रात की तन्हाई में जब उनकी याद आती है, तपते हुए सहरा में जैसे बरसात आती है, पर वो बरसात भी अश्कों की होती है, जो सिर्फ दर्द के नए जख्म दे जाती है।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
बिछड़ने का दुख तो था ही दिल को, पर तेरी बेरुखी ने और भी तोड़ दिया, हम तो चले थे वफ़ा की राह पर, तूने बीच राह में ही क्यों साथ छोड़ दिया?
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
कांच की तरह टूट कर बिखर गए हम, अब किसी को चुभ न जाएँ इसलिए सिमट गए हम, जो कभी कहते थे कि धड़कन हो तुम हमारी, आज उनकी ही नज़रों में पत्थर बन गए हम।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
शायद हमारा ही कसूर था जो बेपनाह चाह बैठे, वरना पत्थर दिलों में कभी फूल खिला नहीं करते, वो तो खुश हैं अपनी नई दुनिया बसा कर, पर हम आज भी उन्हीं गलियों में भटका करते हैं।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
एक अजीब सी खामोशी छाई है दिल के वीराने में, जैसे कोई मुसाफिर थक कर सो गया हो आशियाने में, अब न कोई उम्मीद है और न ही कोई आरज़ू, ज़िंदगी कट रही है बस वक़्त को गँवाने में।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
लिखना तो था कि हम खुश हैं बहुत उनके बिना, मगर कम्बख्त आँसुओं ने कागज़ पर स्याही को फैला दिया, कोशिश तो बहुत की थी दर्द को छुपाने की, पर बंद आँखों ने ही सारा राज़ ज़माने को बता दिया।
— अज्ञात