जब कोई व्यक्ति लोन नहीं चुका पाता, तो बैंक उसे कुछ छूट देकर लोन 'सेटल' करने का विकल्प देता है। यह राहत भले ही लगे, लेकिन भविष्य के वित्तीय जीवन के लिए यह एक बड़ा जाल साबित होता है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- लोन सेटलमेंट में बैंक बकाया ब्याज या मूलधन माफ कर देता है, लेकिन सिबिल में 'Settled' या 'Written Off' लिख देता है।
- सिबिल स्कोर तुरंत 100 से 150 अंक तक गिर जाता है और अगले 7 वर्षों तक क्रेडिट हिस्ट्री में दर्ज रहता है।
- भविष्य में किसी भी बैंक से होम लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना लगभग असंभव हो जाता है।
- सेटलमेंट के बाद बची हुई छूट राशि बैंक को चुकाकर नो-ड्यूज सर्टिफिकेट (NDC) लेकर स्टेटस 'Closed' कराया जा सकता है।
1. लोन क्लोज्ड बनाम लोन सेटल्ड में अंतर
| मापदंड | लोन क्लोज्ड (Loan Closed) | लोन सेटल्ड (Loan Settled) |
|---|---|---|
| भुगतान | पूरा मूलधन और ब्याज 100% चुकाया गया | कम पैसे देकर समझौता किया गया |
| सिबिल स्टेटस | Positive ('Closed') | Negative ('Settled / Written Off') |
| सिबिल स्कोर पर असर | स्कोर मजबूत होता है (750+) | स्कोर बुरी तरह क्रैश हो जाता है |
| भविष्य में लोन | आसानी से न्यूनतम ब्याज पर मिलता है | बैंक डिफ़ॉल्टर मानकर लोन रिजेक्ट कर देते हैं |
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या सेटल्ड लोन को दोबारा ठीक किया जा सकता है?
A: हां, बैंक में जाकर वह माफ की गई राशि ब्याज सहित चुकाएं और बैंक से 'No Dues Certificate' लेकर सिबिल में डिस्प्यूट रेज कर स्टेटस 'Closed' कराएं।
Q: क्या सेटलमेंट से बेहतर कोई अन्य विकल्प है?
A: हां, बैंक से लोन रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) कराएं, लोन की अवधि (Tenure) बढ़वाकर ईएमआई कम करवाएं ताकि डिफ़ॉल्टर टैग न लगे।