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Police & Criminal Law 8 min read • Oct 07, 2026 • 3 Views

नए आपराधिक कानून (BNS & BNSS 2024-2026): Zero FIR क्या है? पुलिस गिरफ्तारी और पूछताछ के समय आम नागरिक के 10 कानूनी अधिकार

भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत आम नागरिक के अधिकार: किसी भी थाने में Zero FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया, पुलिस गिरफ्तारी के समय सुप्रीम कोर्ट के अनिवार्य नियम और मुफ्त कानूनी सहायता।

Advocate Sanjay Yadav
Advocate Sanjay Yadav
🏛️ Rajasthan High Court, Jaipur • Legal Counsel
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नए आपराधिक कानून (BNS & BNSS 2024-2026): Zero FIR क्या है? पुलिस गिरफ्तारी और पूछताछ के समय आम नागरिक के 10 कानूनी अधिकार
## भारतीय न्याय संहिता (BNS) और BNSS: नए कानूनों में आम नागरिक के सुरक्षा अधिकार भारत में 1 जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून—**भारतीय न्याय संहिता (BNS)**, **भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)** और **भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)**—ने देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। इन कानूनों का मुख्य उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि पीड़ित को त्वरित न्याय दिलाना और आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अक्सर देखा जाता है कि कानूनी जानकारी के अभाव में लोग थानों और पुलिस की कार्रवाई से घबरा जाते हैं। **शायरी मंच लीगल हब** पर राजस्थान हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता **एडवोकेट संजय यादव** के मार्गदर्शन में जानिए कि नए आपराधिक कानूनों के तहत **Zero FIR (जीरो एफआईआर)** क्या है और पुलिस गिरफ्तारी या पूछताछ के समय हर भारतीय नागरिक के पास कौन-से 10 मजबूत कानूनी अधिकार हैं। --- ### 1. Zero FIR (जीरो एफआईआर) क्या है और इसे दर्ज कराने का नियम? अक्सर जब कोई संज्ञेय अपराध (जैसे लूट, दुर्घटना, बलात्कार, अपहरण या गंभीर मारपीट) होता है, तो पीड़ित जब नजदीकी थाने जाता है तो पुलिस क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का हवाला देकर मामला दर्ज करने से मना कर देती थी। **नए कानून BNSS की धारा 173 के तहत स्पष्ट प्रावधान है:** * **किसी भी थाने में रिपोर्ट:** घटना चाहे किसी भी शहर, राज्य या इलाके में घटी हो, पीड़ित भारत के किसी भी पुलिस थाने में जाकर तुरंत एफआईआर दर्ज करवा सकता है। * **शून्य (0) नंबर की एफआईआर:** जिस थाने के अधिकार क्षेत्र में घटना नहीं हुई है, वह अपराध दर्ज करते समय एफआईआर नंबर की जगह **'0' (Zero)** लिखता है और प्रारंभिक जांच/मेडिकल सहायता के बाद संबंधित थाने को केस ट्रांसफर कर देता है। * **पुलिस मना नहीं कर सकती:** यदि कोई पुलिस अधिकारी संज्ञेय अपराध में Zero FIR दर्ज करने से इनकार करता है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। --- ### 2. पुलिस गिरफ्तारी के समय सुप्रीम कोर्ट के अनिवार्य नियम (D.K. Basu Guidelines) सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले (डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य) तथा नए BNSS के तहत गिरफ्तारी के समय पुलिस को निम्नलिखित नियमों का पालन करना अनिवार्य है: 1. **वर्दी और पहचान पत्र (Name Tag):** गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी की वर्दी पर उसका नाम और पद (Designation) साफ दिखाई देना चाहिए। 2. **गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार (Right to know grounds of arrest):** पुलिस आपको यह बताए बिना गिरफ्तार नहीं कर सकती कि किस धारा और किस आरोप में आपको हिरासत में लिया जा रहा है। 3. **गिरफ्तारी मेमो (Arrest Memo):** गिरफ्तारी के समय पुलिस को मौके पर 'अरेस्ट मेमो' तैयार करना होता है, जिसमें गिरफ्तारी की तारीख, सटीक समय और स्थान लिखा होता है। इस पर कम से कम एक गवाह (परिवार का सदस्य या स्थानीय व्यक्ति) के हस्ताक्षर होने चाहिए। 4. **परिजन या मित्र को सूचना (Right to Inform Relative):** गिरफ्तार व्यक्ति को यह अधिकार है कि वह अपनी गिरफ्तारी और थाने की जानकारी तुरंत अपने किसी रिश्तेदार, दोस्त या वकील को दे सके। पुलिस को 8 से 12 घंटे के भीतर परिजनों को सूचित करना अनिवार्य है। 5. **मेडिकल जांच का अधिकार (Right to Medical Examination):** गिरफ्तारी के समय और हिरासत के दौरान हर 48 घंटे में किसी मान्यता प्राप्त डॉक्टर से मेडिकल जांच कराने का अधिकार है, ताकि पुलिस प्रताड़ना (Custodial Torture) का कोई अंदेशा न रहे। --- ### 3. धारा 35 BNSS (पूर्व में 41A CrPC): नोटिस का नियम नए कानून **BNSS की धारा 35** के अनुसार, यदि किसी अपराध में सजा का प्रावधान **7 वर्ष या उससे कम** है, तो पुलिस सीधे तौर पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती। * पुलिस को पहले उस व्यक्ति को थाने में उपस्थित होने के लिए **लिखित नोटिस (Notice of Appearance)** देना होगा। * यदि व्यक्ति जांच में सहयोग करता है और नोटिस की शर्तों का पालन करता है, तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। --- ### 4. महिलाओं के लिए विशेष कानूनी सुरक्षा भारतीय कानून में महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान हैं: * **सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तारी निषेध:** किसी भी महिला को शाम के बाद (सूर्यास्त) और सुबह से पहले (सूर्योदय) गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, सिवाय असाधारण परिस्थितियों के जिसमें प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है। * **महिला पुलिसकर्मी की अनिवार्य उपस्थिति:** महिला की गिरफ्तारी और तलाशी केवल महिला पुलिस अधिकारी द्वारा ही की जा सकती है। पुरुष पुलिसकर्मी महिला को छू नहीं सकता। * **थाने में बुलाने की मनाही:** 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और महिलाओं को गवाही या पूछताछ के लिए थाने नहीं बुलाया जा सकता; उनकी पूछताछ उनके निवास स्थान पर ही की जाएगी। --- ### 5. 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी (Article 22 & BNSS) संविधान के अनुच्छेद 22(2) और BNSS के तहत: * पुलिस किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक अपनी हिरासत में नहीं रख सकती (यात्रा का समय छोड़कर)। * 24 घंटे के भीतर उस व्यक्ति को नजदीकी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Magistrate) के समक्ष पेश करना अनिवार्य होता है। मजिस्ट्रेट ही तय करता है कि आरोपी को पुलिस रिमांड पर भेजा जाए या न्यायिक हिरासत (जेल) में या जमानत दी जाए। --- ### 6. मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार (Free Legal Aid - Article 39A) यदि गिरफ्तार व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर है और अपना निजी वकील नहीं रख सकता, तो: * राज्य सरकार और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के तहत उसे **मुफ्त सरकारी वकील (Legal Aid Advocate)** उपलब्ध कराया जाएगा। * मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होते ही आरोपी मुफ्त कानूनी सहायता की मांग कर सकता है। --- ### 7. अगर पुलिस एफआईआर लिखने से मना करे तो क्या करें? यदि कोई थाना आपकी शिकायत दर्ज करने से मना करता है, तो आपके पास ये रास्ते हैं: 1. **वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत:** अपनी शिकायत की प्रति डाक या व्यक्तिगत रूप से जिले के पुलिस अधीक्षक (SP / DCP / Commissioner) को भेजें। 2. **ई-एफआईआर (e-FIR):** राज्य पुलिस के आधिकारिक वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन ई-एफआईआर दर्ज कराएं। 3. **न्यायालय में परिवाद (BNSS धारा 175 - पूर्व में 156(3) CrPC):** वकील के माध्यम से मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी दाखिल करें। मजिस्ट्रेट पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करने और जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दे सकता है। --- ### विधिक सलाह व सहायता कानूनी अधिकारों की जानकारी ही आपकी सबसे बड़ी ढाल है। किसी भी कानूनी विवाद, संपत्ति मामले, पारिवारिक या आपराधिक मसले पर अनुभवी विधिक परामर्श के लिए आप **राजस्थान हाई कोर्ट के अधिवक्ता संजय यादव** से शायरी मंच लीगल हब ([/kanuni-adhikar](/kanuni-adhikar)) पर सीधे संपर्क कर सकते हैं। * **हेल्पलाइन व परामर्श:** +91-7891434748 * **अदालत:** राजस्थान हाई कोर्ट, जयपुर (Rajasthan High Court, Jaipur)
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