फाइनेंशियल मार्केट्स का पुराना नियम है कि जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रखते हैं, तो निवेशक सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्ति को छोड़कर बॉन्ड्स और फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगाते हैं। लेकिन 2026 में यह नियम टूट चुका है। ऊंची ब्याज दरों के बावजूद सोना नए ऐतिहासिक रिकॉर्ड छू रहा है। इसके पीछे वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में आ रहा बड़ा संरचनात्मक बदलाव है।
डी-डॉलराइजेशन और केंद्रीय बैंकों की रणनीति
रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद विदेशी मुद्रा भंडार जब्त होने के डर से चीन, भारत, तुर्की और मध्य पूर्व के देशों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करके भौतिक सोने की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई है। केंद्रीय बैंकों द्वारा की जाने वाली इस भारी खरीदारी ने कीमतों को एक मजबूत आधार प्रदान किया है।