चार्जशीट (आरोप पत्र) क्या है? पुलिस जांच के बाद अदालत में चालान पेश करने के नियम
धारा 193 बीएनएसएस (पूर्व 173 सीआरपीसी) के तहत 60 या 90 दिन में चार्जशीट, गवाहों के बयान, फोरेंसिक साक्ष्य और डिफॉल्ट बेल (Default Bail) का अधिकार।
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धारा 193 बीएनएसएस (पूर्व 173 सीआरपीसी) के तहत 60 या 90 दिन में चार्जशीट, गवाहों के बयान, फोरेंसिक साक्ष्य और डिफॉल्ट बेल (Default Bail) का अधिकार।
पीड़ित को निशुल्क एफआईआर कॉपी पाने का अधिकार, राजस्थान पुलिस सिटीजन पोर्टल से ई-कॉपी डाउनलोड और आरोपी को कोर्ट से चालान कॉपी प्राप्ति।
पुलिस द्वारा पेश एफआर (FR/Final Report), प्रोटेस्ट पिटीशन (Protest Petition) और हाई कोर्ट में धारा 528 बीएनएसएस (पूर्व 482 सीआरपीसी) में क्वैशिंग।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(1) के तहत क्षेत्राधिकार से बाहर प्राथमिकी दर्ज कराने की बाध्यता और पुलिस के इनकार पर कानूनी उपाय।
घटनास्थल के क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना देश के किसी भी पुलिस थाने में अपराध दर्ज कराने का अधिकार और संबंधित थाने को केस ट्रांसफर नियम।
संज्ञेय (Cognizable) बनाम असंज्ञेय (Non-cognizable) अपराध, एफआईआर दर्ज करने की बाध्यता और केवल शिकायत पत्र में अंतर।
घटना का सही विवरण, समय, स्थान, गवाहों के नाम और निशुल्क एफआईआर की प्रति (Free Copy of FIR) प्राप्त करने का कानूनी अधिकार।
थानाधिकारी द्वारा एफआईआर न लिखने पर पुलिस अधीक्षक (SP) को डाक से शिकायत और मजिस्ट्रेट कोर्ट में 156(3) CrPC/BNSS के तहत एफआईआर का आदेश।
चोरी, गुमशुदगी और गैर-संज्ञेय मामलों में घर बैठे ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज कराने और रसीद प्राप्त करने की संपूर्ण गाइड।