दर्द और तन्हाई शायरी

दर्द और तन्हाई शायरी

टूटे दिल और जुदाई के एहसासों को बयां करती दर्द भरी शायरी।

दर्द और तन्हाई शायरी
रातों की तन्हाई में जब तेरा नाम आता है, दर्द की महफ़िल में फिर से एक नया चिराग जलता है।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
हम उस मोड़ पर आ पहुंचे हैं अपनी जिंदगी के, जहाँ अब तन्हाई भी हमसे दूर जाने लगी है।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
वो रुलाकर मुस्कुराने की आदत रखते हैं, हम रोकर भी उनकी खुशी की दुआ करते हैं।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
दिल का दर्द आँखों से बयाँ होता रहा, और दुनिया समझती रही कि हमें रोने का शौक है।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
अब तो अपनी परछाई भी पराई सी लगती है, जब से तूने मुझसे अपना मुँह मोड़ा है।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
काँच के ख़्वाब थे जो हाथों से छूट गए, अब चुभन ही बाकी है और आरज़ू का क्या करें।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
टूटे हुए दिल का सुकून ढूंढने निकले थे, हर कदम पर सिर्फ़ यादों का सन्नाटा ही मिला।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
उसने पूछा था क्या दर्द होता है बिछड़ने में, हम मुस्कुरा दिए और अपनी आख़िरी साँस लिख दी।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
कभी फुर्सत मिले तो मेरी वीरानी में आकर देखना, हम कैसे जलते हैं चिरागों की तरह तेरे बिना।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
हम वो हैं जो हंसते हुए भी रो पड़ते हैं, जब तेरी यादों की हवा चुपके से गुज़रती है।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
कुछ ज़ख्म ऐसे हैं जो दिखते नहीं मगर, रिश्ते तमाम उनसे भी गहरे उतर गए।
— अज्ञात
दर्द और तन्हाई शायरी
खामोशियाँ ही बेहतर हैं अब इस शहर में, यहाँ लफ़्ज़ों के मतलब अक्सर बदल जाते हैं।
— अज्ञात
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