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दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी

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आज का अनमोल विचार
भरोसा एक ऐसा काँच है जो टूटे तो दरार रह जाती है, सच्चे रिश्तों की महक सदियों तक दिल में समा जाती है।
— अज्ञात
आज का अनमोल विचार
थक कर बैठ जाना ही इंसान की सबसे बड़ी हार है, हर गिरते हुए कदम से सीख लेना ही असली हुनरगार है।
— अज्ञात
आज का अनमोल विचार
चेहरे की सुंदरता तो ढल जाती है ढलती उम्र के साथ, अच्छे विचार और नेक काम ही रहते हैं ताउम्र साथ।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
वादे कागज़ी हैं, इरादों में कोई नूर नहीं, ये अवाम है साहब, अब बहकना मंज़ूर नहीं। एक ऊँगली पर लगी स्याही तख़्त बदल देती है, रहनुमा ये न समझें कि जम्हूरियत मजबूर नहीं।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
पाँच सालों तक जो चौखट पर कभी आते नहीं, चुनाव आते ही वो हर दर्द सीने से लगाते हैं। माँगते हैं वोट जो विकास के झूठे नाम पर, जीतते ही वही चेहरा अक्सर भूल जाते हैं।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
मज़हब के नाम पर न बाँटो इस वतन की हवा, हमें रोटी, मकान और रोज़गार चाहिए। नफ़रत के नारों से नहीं चलता है ये मुल्क, अमन, भाईचारा और सच्चा प्यार चाहिए।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
चुनाव के मौसम में हर एक चेहरा शरीफ़ लगता है, ग़रीबों की बस्ती का हर एक ज़ख़्म अजीज़ लगता है। जैसे ही गुज़र जाते हैं ये इंतख़ाब के दिन, वही रहनुमा फिर सबसे बड़ा हरीफ़ लगता है।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
अपनी क़िस्मत का फ़ैसला अब ख़ुद तुमको करना है, झूठे वादों के बहकावे में अब न पड़ना है। सोच-समझकर डालना अपना हर एक क़ीमती वोट, आने वाली नस्लों के मुस्तक़बिल को सँवारना है।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
कुर्सी मिलते ही जो अपना लहजा बदल लेते हैं, गाँव की टूटी सड़कों का रस्ता बदल लेते हैं। सावधान ऐ जनता, ये सियासत के बाज़ीगर हैं, मक़सद निकलते ही ये अपना ख़ुदा बदल लेते हैं।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
डिग्रियों का बोझ उठाए घूमता है मुस्तक़बिल, और इलेक्शन में मुद्दे ज़ात-पात के उठते हैं। कब तक यूँही बहलाओगे जुमलों के नाम पर, अब जवाँ ख़्वाब हुक़ूमत से सवाल पूछते हैं।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
जो कल तक हाथ मिलाने से भी कतराते थे, आज वो सर झुकाकर पाँव छूने लगे हैं। मंसूबा क्या है इनका, ज़रा ग़ौर से देखो, इलेक्शन आते ही फिर से जाल बुनने लगे हैं।
— अज्ञात
चुनावी शायरी
एक वोट की क़ीमत को कभी कमज़ोर मत समझना, ये वो चिराग़ है जो अंधेरों को मिटा देता है। अगर सही हाथों में सौंप दी तख़्त की चाबी, तो वही हुक्मरान रआया को शिफ़ा देता है।
— अज्ञात
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