क्रेडिट कार्ड कंपनियां अक्सर बिना ग्राहक की स्पष्ट सहमति के एनुअल फीस, ओवरलिमिट चार्ज, फाइनेंस चार्ज या अवांछित बीमा जोड़ देती हैं। आरबीआई के सख्त नियमों से यह पूरा पैसा वापस मिलता है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- आरबीआई नियमों के अनुसार बिना ग्राहक की स्पष्ट सहमति के कोई भी वैल्यू एडेड सर्विस या कार्ड एक्टिवेट नहीं किया जा सकता।
- अवैध चार्ज दिखने पर तुरंत 30 दिनों के भीतर बैंक के ग्रीवेंस सेल को ईमेल से डिस्प्यूट रेज करें।
- यदि बैंक 30 दिनों में समाधान न करे या शिकायत खारिज करे, तो cms.rbi.org.in पर बैंकिंग लोकपाल में शिकायत करें।
- आरबीआई लोकपाल अवैध चार्ज रिवर्स कराने के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹1 लाख तक का मुआवजा दिला सकता है।
1. क्रेडिट कार्ड के आम छिपे हुए शुल्क (Hidden Charges)
1. अनचाहा इंश्योरेंस
बिना पूछे कार्ड प्रोटेक्शन प्लान (CPP) या क्रेडिट शील्ड जोड़ देना।
2. ऑटो-डेबिट पेनल्टी
बैंक के तकनीकी फॉल्ट से पेमेंट लेट होने पर भारी लेट पेमेंट और जीएसटी लगाना।
3. ओवर-लिमिट चार्ज
बिना पूर्व सहमति के क्रेडिट लिमिट से 1 रुपया भी ज्यादा खर्च होने पर भारी पेनल्टी काटना।
4. रिन्यूअल फीस
'लाइफटाइम फ्री' कहकर दिए गए कार्ड पर गुपचुप तरीके से वार्षिक नवीनीकरण शुल्क लगा देना।
किसी भी कानूनी, दस्तावेजी या जमीनी समस्या के लिए विशेषज्ञ विधिक राय लें
जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या बैंकिंग लोकपाल में शिकायत करने की कोई फीस लगती है?
A: नहीं! आरबीआई लोकपाल में शिकायत करना 100% निशुल्क है और वकील की भी जरूरत नहीं होती।
Q: यदि बिना इस्तेमाल किए कार्ड भेजा गया हो तो?
A: आरबीआई सर्कुलर के अनुसार यदि 30 दिन में ग्राहक कार्ड एक्टिवेट न करे तो बैंक को उसे स्वतः बंद करना होगा; कोई चार्ज नहीं काटा जा सकता।