दल बदल विरोधी कानून: 10वीं अनुसूची, अयोग्यता के नियम और स्पीकर के अधिकार: आया राम गया राम राजनीति को रोकने वाला दल-बदल विरोधी कानून: 10वीं अनुसूची, व्हिप उल्लंघन और दो-तिहाई विलय का नियम।
आइए विस्तार से समझें इस महत्वपूर्ण विषय से जुड़ी हर जरूरी जानकारी, कानूनी व वित्तीय नियम और आम नागरिकों के लिए इसके मुख्य फायदे।
52वां संविधान संशोधन और 10वीं अनुसूची
साल 1985 में राजीव गांधी सरकार के समय 52वें संविधान संशोधन द्वारा दल-बदल विरोधी कानून को संविधान में जोड़ा गया था।
- किसी पार्टी के टिकट पर जीतकर दूसरी पार्टी में शामिल होने पर विधायकी समाप्त हो जाती है।
- सदन में पार्टी के व्हिप के खिलाफ मतदान करने या अनुपस्थित रहने पर अयोग्यता लागू होती है।
दो-तिहाई सदस्यों के विलय का अपवाद
यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई चुने हुए विधायक या सांसद एक साथ किसी अन्य दल में विलय करते हैं तो दल-बदल कानून लागू नहीं होता।
- अयोग्यता याचिका पर निर्णय लेने का प्राथमिक अधिकार सदन के अध्यक्ष यानी स्पीकर के पास होता है।
- सुप्रीम कोर्ट स्पीकर के फैसले की न्यायिक समीक्षा कर सकता है।
"सजग और जागरूक नागरिक ही एक मजबूत लोकतंत्र की असली नींव होते हैं। अपने मताधिकार और संवैधानिक अधिकारों के बारे में सही जानकारी रखें और इस लेख को शेयर करें।"
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या निर्दलीय विधायक किसी पार्टी में शामिल हो सकते हैं?
यदि निर्दलीय विधायक किसी राजनीतिक दल में शामिल होते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द हो जाती है।
व्हिप क्या होता है?
पार्टी द्वारा अपने सांसदों या विधायकों को सदन में अनिवार्य उपस्थिति और मतदान का जारी किया गया औपचारिक लिखित आदेश व्हिप कहलाता है।