राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं: एकल संक्रमणीय मत पद्धति और विधायकों की वोटिंग प्रक्रिया: उच्च सदन राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव कैसे होता है: आनुपातिक प्रतिनिधित्व, प्राथमिक वोट और सीट जीतने का जादुई कोटा फॉर्मूला।
आइए विस्तार से समझें इस महत्वपूर्ण विषय से जुड़ी हर जरूरी जानकारी, कानूनी व वित्तीय नियम और आम नागरिकों के लिए इसके मुख्य फायदे।
राज्यों की परिषद यानी राज्यसभा की संरचना
राज्यसभा संसद का स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता। इसके एक-तिहाई सदस्य हर 2 साल में सेवानिवृत्त होते हैं और उनका कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।
- राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव जनता सीधे नहीं करती बल्कि राज्यों के चुने हुए विधायक यानी एमएलए करते हैं।
- ओपन बैलेट सिस्टम से वोटिंग होती है ताकि क्रॉस-वोटिंग पर रोक लग सके।
जीत का कोटा फॉर्मूला और प्राथमिकता वोटिंग
एक उम्मीदवार को जीतने के लिए कुल वैध वोटों और खाली सीटों के अनुपात में तय कोटा हासिल करना होता है।
- एमएलए प्रत्याशियों को 1, 2, 3 के क्रम में अपनी प्राथमिकता का वोट देते हैं।
- यदि पहली प्राथमिकता में कोटा पूरा नहीं होता तो दूसरी प्राथमिकता के वोट गिने जाते हैं।
"सजग और जागरूक नागरिक ही एक मजबूत लोकतंत्र की असली नींव होते हैं। अपने मताधिकार और संवैधानिक अधिकारों के बारे में सही जानकारी रखें और इस लेख को शेयर करें।"
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?
राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।
राज्यसभा में राष्ट्रपति कितने सदस्यों को मनोनीत करते हैं?
राष्ट्रपति कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र से 12 विशिष्ट सदस्यों को मनोनीत करते हैं।