म्यूचुअल फंड रेगुलर प्लान बनाम डायरेक्ट प्लान: 1 से 1.5 प्रतिशत ज्यादा रिटर्न का राज: रेगुलर प्लान में ब्रोकर कमीशन का नुकसान और डायरेक्ट प्लान चुनकर 20 साल में 20 से 30 लाख रुपये अतिरिक्त बचाने की तकनीक।
आइए विस्तार से समझें इस महत्वपूर्ण विषय से जुड़ी हर जरूरी जानकारी, कानूनी व वित्तीय नियम और आम नागरिकों के लिए इसके मुख्य फायदे।
रेगुलर प्लान में छिपा हुआ एजेंट कमीशन
जब आप किसी बैंक, एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए म्यूचुअल फंड खरीदते हैं तो वह रेगुलर प्लान होता है जिसमें हर साल 1 से 1.5 प्रतिशत कमीशन कटता है।
- डायरेक्ट प्लान में कोई बिचौलिया नहीं होता इसलिए इसका एक्सपेंस रेशियो बहुत कम होता है।
- डायरेक्ट प्लान की एनएवी रेगुलर प्लान से हमेशा अधिक होती है।
लंबे समय में लाखों का बड़ा अंतर
20 से 25 साल की लंबी एसआईपी में यह 1 प्रतिशत का अंतर कंपाउंड होकर 20 से 40 लाख रुपये के बड़े मुनाफे का नुकसान बन जाता है।
- ग्रो, ज़ेरोधा या सीधे एएमसी की वेबसाइट से हमेशा 'Direct-Growth' प्लान ही चुनें।
"शेयर बाजार में पूंजी सुरक्षा और अनुशासन ही सफलता का सबसे बड़ा नियम है। बिना शोध और रिस्क मैनेजमेंट के कभी भी किसी के बहकावे में आकर निवेश न करें।"
उपयोगी फ्री टूल्स और रिसोर्सेज
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या रेगुलर प्लान को डायरेक्ट में स्विच किया जा सकता है?
हां, आप अपने मौजूदा रेगुलर प्लान को आसानी से डायरेक्ट प्लान में स्विच कर सकते हैं।
ग्रोथ और आईडीसीडब्ल्यू में से क्या चुनना चाहिए?
वेल्थ क्रिएशन के लिए हमेशा ग्रोथ विकल्प चुनना चाहिए ताकि मुनाफा दोबारा इन्वेस्ट होता रहे।