चुनावी बॉन्ड और राजनीतिक चंदा: सुप्रीम कोर्ट का फैसला और चुनावी फंडिंग में पारदर्शिता: चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करने का ऐतिहासिक फैसला: राजनीतिक दलों की फंडिंग और चुनावी पारदर्शिता का विश्लेषण।
आइए विस्तार से समझें इस महत्वपूर्ण विषय से जुड़ी हर जरूरी जानकारी, कानूनी व वित्तीय नियम और आम नागरिकों के लिए इसके मुख्य फायदे।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक 5-0 का सर्वसम्मत फैसला
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया।
- अदालत ने कहा कि चंदा देने वाले का नाम गुप्त रखना संविधान के अनुच्छेद 19 1 ए सूचना के अधिकार का उल्लंघन है।
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को सभी चुनावी बॉन्ड की खरीद और रिडेम्पशन का पूरा डेटा सार्वजनिक करने का आदेश दिया गया।
चुनावी चंदे में पारदर्शिता की नई शुरुआत
इस फैसले के बाद कॉरपोरेट कंपनियों और राजनीतिक दलों के बीच चंदे के लेन-देन में जवाबदेही स्थापित हुई है।
- लोकतंत्र में मतदाता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि किस पार्टी को किस उद्योगपति ने कितना चंदा दिया है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चुनावी बॉन्ड किस बैंक द्वारा जारी किए जाते थे?
चुनावी बॉन्ड केवल भारतीय स्टेट बैंक एसबीआई की अधिकृत शाखाओं से जारी किए जाते थे।
क्या राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा टैक्स फ्री होता है?
हां, जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 13ए के तहत पंजीकृत दलों को मिलने वाला वैध चंदा इनकम टैक्स से मुक्त होता है।