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Legal Aid & Courts 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,501 Views

आरटीआई (RTI) कैसे लगाएं? जन सूचना अधिकारी से जानकारी मांगने का ₹10 का फॉर्म व प्रथम अपील

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005: सरकारी विभागों से फाइल नोटिंग, बजट खर्च, टेंडर और भर्ती की जानकारी कैसे निकालें? rtionline.gov.in पर ₹10 में ऑनलाइन अर्जी।

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Legal & Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
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आरटीआई (RTI) कैसे लगाएं? जन सूचना अधिकारी से जानकारी मांगने का ₹10 का फॉर्म व प्रथम अपील

आरटीआई भारत के प्रत्येक नागरिक का एक शक्तिशाली लोकतांत्रिक हथियार है। इसके जरिए आप किसी भी सरकारी विभाग, मंत्रालय, स्कूल या अस्पताल से जानकारी मांग सकते हैं।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • rtionline.gov.in पोर्टल पर केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों में ऑनलाइन आरटीआई संभव।
  • आवेदन शुल्क मात्र ₹10 है (बीपीएल कार्ड धारकों के लिए पूरी तरह निशुल्क)।
  • जन सूचना अधिकारी (PIO) को 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से जानकारी देनी होती है।
  • जीवन और स्वतंत्रता (Life & Liberty) से जुड़े मामलों में केवल 48 घंटे में सूचना देना अनिवार्य।

1. आरटीआई की 3-स्तरीय अपील प्रक्रिया

अपील का स्तर अधिकारी समय सीमा उद्देश्य
मूल आवेदन जन सूचना अधिकारी (CPIO/PIO) 30 दिन में जवाब विभागीय रिकॉर्ड और जानकारी प्राप्त करना
प्रथम अपील (First Appeal) प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (FAA) 30 से 45 दिन जवाब न मिलने या भ्रामक जवाब पर अपील
द्वितीय अपील (Second Appeal) केंद्रीय / राज्य सूचना आयोग (CIC/SIC) अंतिम आदेश अधिकारी पर ₹25,000 का जुर्माना और अनुशासनात्मक कार्रवाई
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: आरटीआई में क्या नहीं पूछा जा सकता?

A: धारा 8 के तहत देश की संप्रभुता, सुरक्षा, कैबिनेट के अनिर्णीत कागजात और किसी व्यक्ति की निजी गोपनीयता से संबंधित जानकारी नहीं मांगी जा सकती।

Q: अगर 30 दिन में जवाब न मिले तो क्या करें?

A: आप उसी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी (First Appellate Authority) के समक्ष प्रथम अपील निःशुल्क दाखिल कर सकते हैं।

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ई-कोर्ट (eCourts Services) पोर्टल से केस स्टेटस, अगली तारीख व आदेश की कॉपी कैसे चेक करें?

जिला न्यायालय, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के मुकदमों की ऑनलाइन जानकारी: CNR नंबर से केस सर्च, कॉज लिस्ट (Cause List) और जजमेंट डाउनलोड करने की पूरी विधि।

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सड़क हादसे में घायल होने या मृत्यु पर परिजनों को मिलने वाला कानूनी मुआवजा: मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के नियम, आय का निर्धारण और बीमा कंपनी से क्लेम वसूली।

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लोक अदालत में फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती, दोनों पक्षों की जीत होती है और अदा की गई कोर्ट फीस भी वापस मिल जाती है।

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