मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत किसी भी सड़क दुर्घटना में पीड़ित या उसके परिजनों को भारी वित्तीय मुआवजा पाने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- दुर्घटना के बाद पुलिस को 30 दिनों में विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (Detailed Accident Report - DAR) MACT कोर्ट में पेश करनी होती है।
- मुआवजा मृतक या घायल व्यक्ति की उम्र, मासिक आय और आश्रितों की संख्या के आधार पर तय होता है।
- थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होने पर पूरा मुआवजा बीमा कंपनी द्वारा वहन किया जाता है।
- हिट एंड रन (Hit and Run) मामलों में सोलेशियम फंड से सरकार द्वारा अनुग्रह राशि दी जाती है।
1. MACT क्लेम में मुआवजा तय करने का फॉर्मूला
- मृतक की वास्तविक मासिक आय (इनकम टैक्स रिटर्न, सैलरी स्लिप या न्यूनतम मजदूरी दर)
- भविष्य की संभावनाओं (Future Prospects) के लिए आय में 40% से 50% की अतिरिक्त वृद्धि
- पारिवारिक खर्चों के लिए 1/3 या 1/4 हिस्सा काटकर मल्टीप्लायर (Multiplier) से गुणा
- अंतिम संस्कार, कंसोर्टियम (जीवनसाथी का नुकसान) और मानसिक आघात का अतिरिक्त हर्जाना
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: MACT केस में दावा करने की समय सीमा क्या है?
A: 2019 के नए संशोधन के अनुसार दुर्घटना की तारीख से 6 महीने के भीतर क्लेम पिटीशन दाखिल करना आवश्यक है।
Q: अगर टक्कर मारने वाली गाड़ी के पास इंश्योरेंस न हो तो?
A: गाड़ी के मालिक और चालक की व्यक्तिगत संपत्तियों को कुर्क कर कोर्ट मुआवजे की वसूली सुनिश्चित करती है।