विश्वास मत और अविश्वास प्रस्ताव क्या है: संसद में सरकार गिराने और बचाने की प्रक्रिया: लोकसभा में सरकार का बहुमत साबित करने और अविश्वास प्रस्ताव लाकर सरकार गिराने के कड़े संसदीय नियम।
आइए विस्तार से समझें इस महत्वपूर्ण विषय से जुड़ी हर जरूरी जानकारी, कानूनी व वित्तीय नियम और आम नागरिकों के लिए इसके मुख्य फायदे।
अविश्वास प्रस्ताव यानी नो-कॉन्फिडेंस मोशन के नियम
लोकसभा के नियमों के तहत विपक्ष केवल लोकसभा में ही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है।
- प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का लिखित समर्थन अनिवार्य होता है।
- स्वीकार होने पर स्पीकर बहस का दिन तय करते हैं और अंत में वोटिंग होती है।
यदि प्रस्ताव पास हो जाए तो क्या होता है
यदि अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में बहुमत मिल जाता है तो प्रधानमंत्री और पूरी मंत्रिपरिषद को तुरंत इस्तीफा देना पड़ता है।
- विश्वास मत सरकार अपनी मर्जी से अपना संख्याबल साबित करने के लिए लाती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या राज्यसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है?
नहीं, अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है क्योंकि सरकार लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
भारत में पहला अविश्वास प्रस्ताव किसके खिलाफ लाया गया था?
साल 1963 में जेबी कृपलानी द्वारा प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार के खिलाफ पहला प्रस्ताव लाया गया था।