राज्य सरकारें प्रत्येक क्षेत्र, कॉलोनी और कृषि भूमि के लिए एक न्यूनतम सरकारी दर तय करती हैं, जिससे कम कीमत पर रजिस्ट्री नहीं हो सकती। इसे ही सर्कल या डीएलसी रेट कहते हैं।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- राजस्थान में इसे DLC (District Level Committee) रेट, महाराष्ट्र में रेडी रेकनर और यूपी/दिल्ली में सर्कल रेट कहते हैं।
- व्यावसायिक (Commercial) भूमि की दर हमेशा आवासीय (Residential) भूमि से अधिक होती है।
- यदि वास्तविक सौदा सर्कल रेट से कम में हुआ हो, तब भी स्टांप ड्यूटी सर्कल रेट पर ही लगेगी।
- आयकर अधिनियम की धारा 50C के तहत सर्कल रेट से कम पर बेचने पर अतिरिक्त कैपिटल गेन टैक्स लगता है।
1. रजिस्ट्री खर्च का गणित (उदाहरण)
| मद | गणना का आधार | उदाहरण (₹50 लाख वैल्यू) |
|---|---|---|
| स्टांप ड्यूटी (पुरुष) | सर्कल रेट वैल्यू का 6% | ₹3,00,000 |
| स्टांप ड्यूटी (महिला) | सर्कल रेट वैल्यू का 5% | ₹2,50,000 |
| पंजीयन शुल्क (Registration Fee) | वैल्यू का 1% | ₹50,000 |
| सरचार्ज व अन्य उपकर | स्टांप ड्यूटी का 10-20% | ₹30,000 - ₹60,000 |
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: अपने इलाके का सर्कल रेट ऑनलाइन कैसे देखें?
A: संबंधित राज्य के राजस्व या आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर जाकर जिला, तहसील और खसरा/वार्ड नंबर डालकर तुरंत चेक किया जा सकता है।
Q: क्या सर्कल रेट हर साल बदलता है?
A: हां, जिला स्तरीय समितियां बाजार भाव के आधार पर आमतौर पर प्रत्येक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल) में दरों की समीक्षा करती हैं।