जमीन या मकान की केवल रजिस्ट्री (Sale Deed) करा लेना ही काफी नहीं है, सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम हटाकर नया नाम दर्ज कराना दाखिल-खारिज कहलाता है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- रजिस्ट्री के बाद सरकारी राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया को नामांतरण कहते हैं।
- तहसीलदार या नायब तहसीलदार द्वारा 30 से 45 दिनों में नामांतरण स्वीकृत किया जाता है।
- नामांतरण के बिना आप जमीन पर सरकारी मुआवजा, कृषि ऋण या बिक्री का कानूनी अधिकार नहीं पाते।
- नामांतरण रिजेक्ट होने पर 30 दिनों के भीतर उपखंड अधिकारी (SDM) के समक्ष अपील की जा सकती है।
1. दाखिल-खारिज के 4 प्रकार
1. बैनामा नामांतरण (Sale Mutation)
जमीन या प्लॉट की खरीद-फरोख्त की रजिस्ट्री के आधार पर दर्ज होने वाला नामांतरण।
2. वरासत नामांतरण (Inheritance Mutation)
खातेदार की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिसों (बेटे, बेटी, पत्नी) के नाम दर्ज होने वाला नामांतरण।
3. बंटवारा नामांतरण (Partition Mutation)
पारिवारिक या अदालती बंटवारे के अनुसार अलग-अलग खाते बनने पर होने वाला नामांतरण।
4. रहन / बंधक नामांतरण (Mortgage Mutation)
बैंक से लोन लेने या लोन चुकता करने पर बैंक का चार्ज दर्ज या मुक्त करने वाला नामांतरण।
किसी भी कानूनी, दस्तावेजी या जमीनी समस्या के लिए विशेषज्ञ विधिक राय लें
जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: दाखिल-खारिज में कोई आपत्ति (Objection) लगा दे तो क्या करें?
A: मामला तनाजा (Disputed) दर्ज हो जाता है और तहसीलदार दोनों पक्षों के साक्ष्य सुनकर गुण-दोष के आधार पर फैसला करता है।
Q: क्या नामांतरण मालिकाना हक (Title) तय करता है?
A: नहीं, सुप्रीम कोर्ट के अनुसार नामांतरण केवल टैक्स और लगान वसूली का रिकॉर्ड है, अंतिम मालिकाना हक सिविल कोर्ट तय करता है।