राजस्थान कानूनी अधिकार एवं
नागरिक विधिक सहायता पोर्टल
जमीन-जायदाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), किराया कानून, वैवाहिक विवाद, उपभोक्ता संरक्षण, साइबर फ्रॉड, पुलिस एफआईआर और वरिष्ठ नागरिकों के 100 महत्वपूर्ण कानूनी अधिकारों की संपूर्ण, सरल व प्रामाणिक जानकारी।
क्या आपका कोई कानूनी विवाद है?
जमीन, वसीयत, चेक बाउंस, पुलिस केस, तलाक या पारिवारिक विवाद में सीधे हाई कोर्ट के अधिवक्ता से परामर्श लें।
WhatsApp पर संपर्क करेंमुफ्त सरकारी वकील और कानूनी मदद पाने के लिए डीएलएसए (DLSA) में आवेदन कैसे करें? (How to Apply for Free Legal Aid in Rajasthan)
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) या तालुका कमेटी में सादे कागज पर आवेदन, आय प्रमाण पत्र और निशुल्क पैरवी की प्रक्रिया।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA - राल्सा) क्या है और आम जनता को इसका क्या लाभ है? (What Is the Rajasthan State Legal Services Authority?)
राल्सा द्वारा आयोजित लोक अदालतें, कानूनी साक्षरता शिविर और पीड़ित प्रतिकर योजना (Victim Compensation Scheme)।
राजस्थान में राष्ट्रीय लोक अदालत: मुकदमों का बिना कोर्ट फीस तुरंत व अंतिम निपटारा (Lok Adalat in Rajasthan: How Does It Work?)
लोक अदालत में फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती, दोनों पक्षों की जीत होती है और अदा की गई कोर्ट फीस भी वापस मिल जाती है।
लोक अदालत में कौन-कौन से केस सुलझ सकते हैं: चेक बाउंस, पारिवारिक, बैंक ऋण व एक्सीडेंट क्लेम (Which Cases Can Be Settled Through Lok Adalat?)
राजीनामा योग्य आपराधिक मामले, बिजली-पानी के बिल विवाद, वैवाहिक विवाद और भूमि अधिग्रहण मुआवजे के मामलों का सरल निपटारा।
बिना कोर्ट-कचहरी जाए आपसी विवाद सुलझाने के आसान कानूनी विकल्प (ADR) (How to Settle a Small Dispute Without Going to Court)
वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR): मध्यस्थता (Mediation), सुलह (Conciliation) और लोक अदालत द्वारा समय और पैसे की बचत।
दीवानी अदालत (Civil Court) और फौजदारी अदालत (Criminal Court) में क्या अंतर है? (Civil Court vs Criminal Court: What's the Difference?)
अधिकारों व संपत्ति के विवाद (हर्जाना/कब्जा) बनाम अपराध व सजा (जेल/जुर्माना) के मुकदमों की अदालती कार्यप्रणाली की तुलना।
मध्यस्थता (Mediation) क्या है और इससे पारिवारिक व व्यापारिक विवाद कैसे सुलझते हैं? (What Is Mediation and How Can It Help Resolve Disputes?)
मध्यस्थता केंद्र में प्रशिक्षित मध्यस्थ (Mediator) के सामने दोनों पक्षों की गोपनीय बातचीत और कोर्ट द्वारा अनुमोदित समझौते की मान्यता।
भारत में कोर्ट केस में कितना समय लगता है और केस जल्दी निपटाने के कानूनी उपाय (How Long Does a Court Case Take? Understanding the Basics)
तारीख पर तारीख से बचने के उपाय, फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Courts), और त्वरित न्याय पाने के लिए कानूनी रास्ते।
वेतन भुगतान कानून: समय पर पूरा वेतन पाने का हर कर्मचारी का कानूनी अधिकार (Employee Rights Regarding Salary Payment)
पेमेंट ऑफ वेजेस एक्ट (Payment of Wages Act): महीने की 7 या 10 तारीख तक वेतन भुगतान की अनिवार्यता और बिना वजह देरी पर हर्जाना।
कंपनी या मालिक सैलरी रोक ले तो क्या करें? लेबर कमिश्नर व कानूनी नोटिस के नियम (What to Do If Your Employer Doesn't Pay Your Salary?)
सैलरी रुकने पर वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भेजना, श्रम न्यायालय (Labour Court) में धारा 33C(2) के तहत वसूली का दावा।
क्या कंपनी बिना नोटिस या बिना कारण बताए कर्मचारी को नौकरी से निकाल सकती है? (Can an Employer Terminate an Employee Without Notice?)
अवैध छंटनी (Illegal Termination), नोटिस पीरियड या नोटिस वेतन (Notice Pay) और औद्योगिक विवाद अधिनियम (Industrial Disputes Act) के नियम।
जॉब ऑफर व एग्रीमेंट साइन करने से पहले सर्विस बॉन्ड और शर्तों की कानूनी जांच (Employment Agreement: Important Clauses to Check)
क्या सर्विस बॉन्ड (Employment Bond) कानूनी रूप से मान्य है? भारतीय अनुबंध अधिनियम धारा 27 और गैर-प्रतिस्पर्धा क्लॉज (Non-compete)।