राजस्थान कानूनी अधिकार एवं
नागरिक विधिक सहायता पोर्टल
जमीन-जायदाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), किराया कानून, वैवाहिक विवाद, उपभोक्ता संरक्षण, साइबर फ्रॉड, पुलिस एफआईआर और वरिष्ठ नागरिकों के 100 महत्वपूर्ण कानूनी अधिकारों की संपूर्ण, सरल व प्रामाणिक जानकारी।
क्या आपका कोई कानूनी विवाद है?
जमीन, वसीयत, चेक बाउंस, पुलिस केस, तलाक या पारिवारिक विवाद में सीधे हाई कोर्ट के अधिवक्ता से परामर्श लें।
WhatsApp पर संपर्क करेंक्या मकान मालिक मनमर्जी से किराया बढ़ा सकता है? किराया वृद्धि के नियम (Can a Landlord Increase Rent Without Notice?)
राजस्थान किराया नियंत्रण कानून के तहत वार्षिक किराया वृद्धि की कानूनी सीमा और बिना पूर्व सहमति किराया बढ़ाने पर पाबंदी।
मकान मालिक द्वारा बिजली-पानी काटने या परेशान करने पर किरायेदार क्या कानूनी एक्शन लें? (What Legal Action Can a Tenant Take Against Harassment?)
मकान मालिक द्वारा आवश्यक सेवाएं बाधित करने पर रेंट ट्रिब्यूनल व पुलिस में तुरंत बहाली हेतु प्रार्थना पत्र देने का नियम।
राजस्थान रेंट ट्रिब्यूनल (Rent Tribunal): किराया विवाद में कहां और कैसे शिकायत करें? (Rent Dispute in Rajasthan: Where Can You Seek Help?)
सिविल कोर्ट के बजाय विशेष रेंट ट्रिब्यूनल में त्वरित न्याय, अपील प्रक्रिया और कानूनी सहायता प्राप्त करने की विधि।
राजस्थान में विवाह पंजीकरण (Marriage Registration): जरूरी दस्तावेज व ऑनलाइन आवेदन (Marriage Registration in Rajasthan: Process and Documents)
पहचान पोर्टल (Pehchan Portal) पर शादी का रजिस्ट्रेशन, शपथ पत्र, वर-वधू व गवाहों के दस्तावेज और प्रमाण पत्र डाउनलोड करने का तरीका।
मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना क्यों जरूरी है और इसके क्या कानूनी फायदे हैं? (Why Is Marriage Registration Important?)
पासपोर्ट, वीजा, संयुक्त बैंक खाता, सरकारी योजनाओं, बीमा क्लेम और उत्तराधिकार में मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता।
राजस्थान में विवाह प्रमाण पत्र (Marriage Certificate) कैसे प्राप्त करें? (How to Get a Marriage Certificate in Rajasthan)
शादी के बाद निर्धारित समय सीमा, ग्राम पंचायत / नगर निगम में आवेदन और देरी होने पर लेट फीस के साथ प्रमाण पत्र प्राप्त करने के नियम।
आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce): हिंदू विवाह अधिनियम धारा 13B (Divorce by Mutual Consent: Basic Legal Process)
दोनों पक्षों की रजामंदी से तलाक की अर्जी, 6 महीने का कूलिंग पीरियड, सुप्रीम कोर्ट की नई छूट और स्थायी भरण-पोषण की शर्तें।
तलाक या अलगाव के बाद भरण-पोषण (खर्चा/Maintenance) के कानूनी अधिकार: धारा 125 CrPC (Maintenance Rights After Separation or Divorce)
पत्नी, बच्चों और वृद्ध माता-पिता के लिए गुजारा भत्ता तय करने के आधार, अंतरिम भरण-पोषण और पति की वास्तविक आय की जांच।
घरेलू हिंसा अधिनियम 2005: पीड़ित महिलाओं के कानूनी अधिकार व सुरक्षा (Domestic Violence: What Legal Protection Is Available?)
शारीरिक, मानसिक, मौखिक या आर्थिक प्रताड़ना के खिलाफ कानूनी सुरक्षा, हेल्पलाइन 181 और संरक्षण अधिकारी (Protection Officer) की मदद।
घरेलू हिंसा में प्रोटेक्शन ऑर्डर (सुरक्षा आदेश) क्या है और कैसे प्राप्त करें? (Protection Orders in Domestic Violence Cases)
मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी सुरक्षा आदेश, साझा घर में रहने का अधिकार (Residence Order) और प्रताड़ना पर तुरंत रोक लगाने के नियम।
ससुराल की संपत्ति और स्त्रीधन (Stridhan) पर महिला का कानूनी अधिकार (Rights of Women in Matrimonial Property)
स्त्रीधन पर केवल महिला का पूर्ण अधिकार, पति या ससुराल वालों द्वारा स्त्रीधन हड़पने पर धारा 406 के तहत कानूनी कार्रवाई।
माता-पिता की संपत्ति में बच्चों (बेटा और बेटी) का कानूनी अधिकार (Rights of Children in Their Parents' Property)
स्व-अर्जित संपत्ति (Self-Acquired) बनाम पैतृक संपत्ति (Ancestral) में बच्चों के दावे और वसीयत के प्रभाव का कानूनी विश्लेषण।