अक्सर लोग स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए या अनधिकृत कॉलोनियों में जमीन खरीदते समय केवल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) और वसीयत पर सौदा कर लेते हैं। यह कानूनी रूप से भारी जोखिम भरा है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- सुप्रीम कोर्ट के 'सूरज लैम्प इंडस्ट्रीज' ऐतिहासिक फैसले के अनुसार GPA से संपत्ति का मालिकाना हक (Title) ट्रांसफर नहीं होता।
- संपत्ति का वास्तविक ट्रांसफर केवल रजिस्टर्ड सेल डीड (बैनामा) के जरिए ही हो सकता है।
- GPA धारक की मृत्यु होने पर या मूल मालिक द्वारा GPA निरस्त करते ही खरीदार का अधिकार शून्य हो जाता है।
- GPA पर खरीदी गई जमीन पर राष्ट्रीयकृत बैंक कभी भी होम लोन स्वीकृत नहीं करते हैं।
1. GPA से संपत्ति खरीदने के 4 बड़े खतरे
1. कोई मालिकाना हक नहीं
आप केवल संपत्ति की देखभाल के अधिकृत एजेंट रहते हैं, सरकारी रिकॉर्ड में असली मालिक पुराना विक्रेता ही रहता है।
2. दोहरी बिक्री का खतरा
मूल मालिक वही जमीन किसी अन्य व्यक्ति को रजिस्टर्ड सेल डीड से बेच सकता है, जिससे आप बेदखल हो सकते हैं।
3. नामांतरण (Mutation) न होना
राजस्व रिकॉर्ड या नगर निगम में GPA के आधार पर कभी भी दाखिल-खारिज नहीं होता।
4. सरकारी मुआवजे का नुकसान
जमीन सड़क या रेलवे में अधिग्रहीत होने पर पूरा सरकारी मुआवजा मूल मालिक को ही मिलता है, आपको नहीं।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या पुरानी GPA प्रॉपर्टी को अब रजिस्टर्ड कराया जा सकता है?
A: हां, मूल मालिक को सब-रजिस्ट्रार ऑफिस लाकर उचित स्टांप ड्यूटी चुकाकर नियमित सेल डीड कराई जा सकती है।
Q: क्या स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी (SPA) से रजिस्ट्री कराई जा सकती है?
A: हां, यदि मूल मालिक ने आपको रजिस्टर्ड GPA के जरिए बेचने का अधिकार दिया है, तो आप उसके प्रतिनिधि बनकर तीसरे पक्ष को बैनामा कर सकते हैं।