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Legal Awareness 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,501 Views

चेक बाउंस (Cheque Bounce) होने पर क्या करें? धारा 138 NI Act, 30 दिन का लीगल नोटिस और वसूली नियम

बैंक चेक बाउंस होने पर पैसे वापस पाने का अचूक कानूनी तरीका: 30 दिन की नोटिस समय सीमा, कोर्ट केस प्रक्रिया और दोगुना जुर्माना व जेल का प्रावधान।

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Legal & Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
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चेक बाउंस (Cheque Bounce) होने पर क्या करें? धारा 138 NI Act, 30 दिन का लीगल नोटिस और वसूली नियम

व्यापार या व्यक्तिगत लेनदेन में चेक बाउंस होना परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत एक संज्ञेय अपराध है।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • बैंक रिटर्न मेमो (Bank Return Memo) मिलने की तारीख से 30 दिनों के भीतर लीगल नोटिस भेजना अनिवार्य।
  • नोटिस प्राप्त होने के बाद आरोपी को भुगतान के लिए 15 दिन का कानूनी समय मिलता है।
  • 15 दिन में पैसा न मिलने पर अगले 30 दिनों के भीतर सक्षम मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दाखिल करना होता है।
  • कोर्ट चेक राशि का 2 गुना तक जुर्माना और आरोपी को 2 साल तक की जेल की सजा सुना सकती है।

1. चेक बाउंस केस की टाइमलाइन और प्रक्रिया

घटना कानूनी मियाद (Deadline) आवश्यक कार्रवाई
चेक डिसऑनर होना चेक वैधता (3 माह) के भीतर बैंक से मूल चेक और डिसऑनर स्लिप (Memo) प्राप्त करें
लीगल नोटिस भेजना मेमो मिलने के 30 दिनों के अंदर वकील के जरिए रजिस्टर्ड डाक/स्पीड पोस्ट से मांग पत्र भेजें
भुगतान का इंतजार नोटिस तामील के बाद 15 दिन आरोपी को पैसा चुकाने का कानूनी अवसर दें
कोर्ट में परिवाद दाखिल 15 दिन बीतने के अगले 30 दिन में धारा 138 NI Act के तहत मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दर्ज करें

2. अंतरिम मुआवजा (Section 143A NI Act)

  • केस के दौरान ही कोर्ट शिकायतकर्ता को चेक राशि का 20% तक अंतरिम मुआवजा तुरंत दिला सकती है।
  • आरोपी यदि अपील करता है, तो उसे कुल जुर्माने का 20% कोर्ट में जमा कराना अनिवार्य है।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: अगर 30 दिन में लीगल नोटिस न भेजा जाए तो क्या चेक बाउंस केस खारिज हो जाएगा?

A: हां, धारा 138 के तहत आपराधिक केस की समय सीमा निकल जाएगी, लेकिन आप सिविल कोर्ट में 3 साल के भीतर पैसे वसूली का मुकदमा कर सकते हैं।

Q: चेक बाउंस का केस किस शहर की अदालत में चलेगा?

A: जिस बैंक शाखा में शिकायतकर्ता का खाता है और जहां चेक पेश किया गया था, उसी अधिकार क्षेत्र की अदालत में केस चलेगा।

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