व्यापार या व्यक्तिगत लेनदेन में चेक बाउंस होना परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत एक संज्ञेय अपराध है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- बैंक रिटर्न मेमो (Bank Return Memo) मिलने की तारीख से 30 दिनों के भीतर लीगल नोटिस भेजना अनिवार्य।
- नोटिस प्राप्त होने के बाद आरोपी को भुगतान के लिए 15 दिन का कानूनी समय मिलता है।
- 15 दिन में पैसा न मिलने पर अगले 30 दिनों के भीतर सक्षम मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दाखिल करना होता है।
- कोर्ट चेक राशि का 2 गुना तक जुर्माना और आरोपी को 2 साल तक की जेल की सजा सुना सकती है।
1. चेक बाउंस केस की टाइमलाइन और प्रक्रिया
| घटना | कानूनी मियाद (Deadline) | आवश्यक कार्रवाई |
|---|---|---|
| चेक डिसऑनर होना | चेक वैधता (3 माह) के भीतर | बैंक से मूल चेक और डिसऑनर स्लिप (Memo) प्राप्त करें |
| लीगल नोटिस भेजना | मेमो मिलने के 30 दिनों के अंदर | वकील के जरिए रजिस्टर्ड डाक/स्पीड पोस्ट से मांग पत्र भेजें |
| भुगतान का इंतजार | नोटिस तामील के बाद 15 दिन | आरोपी को पैसा चुकाने का कानूनी अवसर दें |
| कोर्ट में परिवाद दाखिल | 15 दिन बीतने के अगले 30 दिन में | धारा 138 NI Act के तहत मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दर्ज करें |
2. अंतरिम मुआवजा (Section 143A NI Act)
- केस के दौरान ही कोर्ट शिकायतकर्ता को चेक राशि का 20% तक अंतरिम मुआवजा तुरंत दिला सकती है।
- आरोपी यदि अपील करता है, तो उसे कुल जुर्माने का 20% कोर्ट में जमा कराना अनिवार्य है।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: अगर 30 दिन में लीगल नोटिस न भेजा जाए तो क्या चेक बाउंस केस खारिज हो जाएगा?
A: हां, धारा 138 के तहत आपराधिक केस की समय सीमा निकल जाएगी, लेकिन आप सिविल कोर्ट में 3 साल के भीतर पैसे वसूली का मुकदमा कर सकते हैं।
Q: चेक बाउंस का केस किस शहर की अदालत में चलेगा?
A: जिस बैंक शाखा में शिकायतकर्ता का खाता है और जहां चेक पेश किया गया था, उसी अधिकार क्षेत्र की अदालत में केस चलेगा।