किसी भी नागरिक को डराना, धमकाना या जान-माल के नुकसान की चेतावनी देना भारतीय कानून में गंभीर दंडनीय अपराध है। नए आपराधिक कानून (BNS) में इसके लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 351 (आपराधिक धमकी - Criminal Intimidation)।
- फोन कॉल रिकॉर्डिंग, व्हाट्सएप चैट और सीसीटीवी फुटेज कानूनी साक्ष्य (Section 61 BSA) के रूप में मान्य।
- गंभीर धमकी (जान से मारने की धमकी) में 7 साल तक का कारावास व गैर-जमानती अपराध।
- स्थानीय पुलिस स्टेशन में लिखित तहरीर देकर तुरंत पावती (Receiving / GD Entry) लें।
1. धमकी मिलने पर तुरंत करने योग्य 4 जरूरी कदम
1. डिजिटल सबूत सुरक्षित करें
कॉल रिकॉर्डिंग, धमकी भरे संदेशों का स्क्रीनशॉट लें और उनका सुरक्षित बैकअप पेन ड्राइव या क्लाउड पर रखें।
2. तुरंत 112 पर सूचना दें
इमरजेंसी होने पर तुरंत 112 डायल करें ताकि पुलिस कंट्रोल रूम में तत्काल घटना रिकॉर्ड हो जाए।
3. थाने में लिखित शिकायत दें
घटना की तारीख, समय, आरोपी का नाम और गवाहों के विवरण के साथ थानेदार को लिखित आवेदन दें।
4. सुरक्षा की मांग करें
यदि जान का गंभीर खतरा है, तो पुलिस अधीक्षक (SP) या कोर्ट से पुलिस सुरक्षा (Police Protection) की मांग करें।
2. BNS में धमकी से संबंधित धाराएं और सजा के नियम
| अपराध का स्वरूप | BNS धारा | पुरानी IPC धारा | सजा का प्रावधान |
|---|---|---|---|
| साधारण धमकी देना | Section 351(2) BNS | Section 506 IPC | 2 वर्ष तक की जेल या जुर्माना |
| जान से मारने या संपत्ति जलाने की धमकी | Section 351(3) BNS | Section 506 (Part 2) IPC | 7 वर्ष तक की जेल व जुर्माना |
| अज्ञात व्यक्ति द्वारा धमकी (गुमनाम) | Section 351(4) BNS | Section 507 IPC | 2 वर्ष की अतिरिक्त जेल |
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या फोन पर धमकी देने पर एफआईआर दर्ज होती है?
A: हां, फोन या सोशल मीडिया पर धमकी देना आपराधिक कृत्य है। ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ थाने में तुरंत बीएनएस धारा 351 के तहत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
Q: अगर पुलिस शिकायत लेने से मना करे तो क्या करें?
A: आप पुलिस अधीक्षक (SP) को डाक या ईमेल से शिकायत भेज सकते हैं, अथवा वकील के जरिए न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में सेक्शन 175(3) BNSS के तहत अर्जी लगा सकते हैं।