भारतीय खान-पान में पनीर एक अत्यंत लोकप्रिय और पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। लेकिन हाल के वर्षों में होटलों, शादियों और किराना दुकानों पर दूध के बजाय पाम ऑयल, स्टार्च और केमिकल पाउडर से बना 'एनालॉग पनीर' धड़ल्ले से बेचा जा रहा था। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अब इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए नए मसौदा नियम जारी किए हैं।
एफएसएसएआई का मुख्य प्रस्ताव
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, केवल वही उत्पाद 'पनीर' या 'छेना' कहलाने का हकदार होगा जो 100% प्राकृतिक गाय या भैंस के दूध से बना हो। वनस्पति वसा, रिफाइंड तेल या सोया प्रोटीन मिलाकर बनाए गए किसी भी कृत्रिम उत्पाद के पैकेट या मेनू कार्ड पर 'पनीर' शब्द का इस्तेमाल करना पूरी तरह गैरकानूनी माना जाएगा। इसे केवल 'नॉन-डेयरी एनालॉग' लिखना अनिवार्य होगा।
असली पनीर पहचानने का सरल घरेलू तरीका: पनीर के टुकड़े पर आयोडीन सॉल्यूशन की कुछ बूंदें डालें। यदि रंग नीला या बैंगनी हो जाए, तो उसमें स्टार्च की मिलावट है। शुद्ध पनीर का रंग नहीं बदलता।