सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसले में बिहार के सैकड़ों दैनिक वेतनभोगी मजदूरों को 25 साल बाद इंसाफ दिया है। शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार की उस तकनीकी याचिका को खारिज कर दिया जिसमें दशकों तक सेवा देने वाले मजदूरों को नियमित वेतन और बकाये से वंचित रखा गया था।
कल्याणकारी राज्य मजदूरों के हक से मुंह नहीं मोड़ सकता
न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि एक लोकतांत्रिक और कल्याणकारी राज्य अपने ही गरीब नागरिकों और मजदूरों से काम लेकर उन्हें न्यूनतम कानूनी अधिकारों और जीवन यापन के बकाये से वंचित नहीं रख सकता। अदालत ने 3 महीने के भीतर ब्याज सहित संपूर्ण भुगतान का अनुपालन हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है।