लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक गिरोहों और सॉल्वर गैंग्स के खिलाफ देश में ऐतिहासिक सख्त कानून लागू हो चुका है। पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट के कड़े प्रावधानों का उद्देश्य संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखना है।
सख्त सजा और जुर्माने के प्रावधान
| अपराध का प्रकार | जेल की सजा | जुर्माना राशि |
|---|---|---|
| व्यक्तिगत रूप से नकल में सहायता करना | 3 से 5 वर्ष तक कठोर कारावास | 10 लाख रुपये तक |
| संगठित पेपर लीक सिंडिकेट और सॉल्वर गैंग | 5 से 10 वर्ष तक कठोर कारावास | न्यूनतम 1 करोड़ रुपये |
| परीक्षा में शामिल सेवा प्रदाता फर्म की लापरवाही | फर्म 4 साल के लिए ब्लैकलिस्ट | 1 करोड़ रुपये प्लस परीक्षा लागत वसूली |
निर्दोष अभ्यर्थियों पर कोई आपराधिक केस नहीं
कानून में यह विशेष स्पष्टीकरण दिया गया है कि निर्दोष परीक्षार्थियों को इस आपराधिक कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। उनके खिलाफ परीक्षा एजेंसी के सामान्य प्रशासनिक नियम लागू होंगे। कानून का मुख्य प्रहार परीक्षा माफिया, प्रिंटिंग प्रेस के भ्रष्ट कर्मियों और कोचिंग सिंडिकेट्स पर केंद्रित है।