प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए अक्सर लोग असमंजस में रहते हैं कि गिफ्ट डीड करें या वसीयत। दोनों के कानूनी प्रभाव, लागत और अधिकार बिल्कुल अलग-अलग होते हैं।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- गिफ्ट डीड रजिस्ट्री होते ही तत्काल प्रभाव से संपत्ति का मालिकाना हक प्राप्तकर्ता को मिल जाता है।
- वसीयत व्यक्ति के जीवित रहते लागू नहीं होती, मृत्यु के बाद ही इसका प्रभाव शुरू होता है।
- गिफ्ट डीड को सब-रजिस्ट्रार के यहां पंजीकृत कराना अनिवार्य है, जिस पर स्टांप ड्यूटी लगती है।
- एक बार वैध रूप से दी गई गिफ्ट डीड को दाता (Donor) अपनी मर्जी से वापस रद्द नहीं कर सकता।
1. गिफ्ट डीड और वसीयत की तुलना
| विषय | गिफ्ट डीड (Gift Deed) | वसीयत (Will) |
|---|---|---|
| प्रभावी होने का समय | रजिस्ट्री के तुरंत बाद | व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात |
| लागत (स्टांप ड्यूटी) | रक्त संबंधों में 1% से 2.5%, अन्य में 5-7% | केवल सामान्य ड्राफ्टिंग व मामूली पंजीयन शुल्क |
| रद्द करने का अधिकार | बिना कोर्ट डिग्री के रद्द नहीं हो सकती | जीवन में कभी भी आसानी से बदली या रद्द की जा सकती है |
| कब्जा व मालिकाना हक | तुरंत नया मालिक बन जाता है | जीवनकाल तक मालिक मूल व्यक्ति ही रहता है |
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या माता-पिता बेटे को दी गई गिफ्ट डीड रद्द करा सकते हैं?
A: हां, वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 की धारा 23 के तहत यदि बेटा भरण-पोषण न करे, तो माता-पिता गिफ्ट डीड शून्य घोषित करा सकते हैं।
Q: क्या गिफ्ट डीड में टैक्स छूट मिलती है?
A: इनकम टैक्स सेक्शन 56(2) के तहत करीबी रिश्तेदारों (माता, पिता, बेटा, बेटी, पत्नी) को मिले गिफ्ट पर कोई टैक्स नहीं लगता।