यदि किसी व्यक्ति ने आपकी जमीन का फर्जी बैनामा करा लिया है, पैसे नहीं दिए या धोखे से अंगूठा लगवा लिया है, तो कानून पीड़ित को रजिस्ट्री निरस्त कराने का पूर्ण अधिकार देता है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- सब-रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्री रद्द करने का अधिकार नहीं होता, यह केवल सक्षम सिविल कोर्ट (Civil Court) ही कर सकती है।
- धारा 31 Specific Relief Act 1963 के तहत सेल डीड रद्दीकरण का दीवानी वाद दाखिल किया जाता है।
- धोखाधड़ी की जानकारी मिलने के 3 साल के भीतर (Limitation Period) मुकदमा दाखिल करना अनिवार्य होता है।
- केस के साथ तुरंत धारा 39 नियम 1 व 2 CPC के तहत जमीन पर निर्माण और आगे बेचने पर स्टे ऑर्डर (Injunction) लें।
1. रजिस्ट्री किन आधारों पर रद्द हो सकती है?
- फर्जी दस्तावेज या किसी अन्य व्यक्ति को खड़ा करके (Impersonation) कराया गया बैनामा
- चेक बाउंस होने या बिक्री प्रतिफल (Sale Consideration) का पैसा खाते में न आना
- नाबालिग या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति द्वारा कराई गई रजिस्ट्री
- धमकाकर, डराकर या नशे की हालत में जबरन कराया गया दस्तावेज
किसी भी कानूनी, दस्तावेजी या जमीनी समस्या के लिए विशेषज्ञ विधिक राय लें
जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: रजिस्ट्री कैंसिलेशन केस में कोर्ट फीस कितनी लगती है?
A: विवादित संपत्ति के सर्कल रेट या बैनामा राशि के मूल्यांकन के आधार पर राज्य के कोर्ट फीस एक्ट के अनुसार कोर्ट फीस देय होती है।
Q: क्या आरोपी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है?
A: हां, सिविल केस के साथ-साथ BNS की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और धारा 336 (जालसाजी) के तहत थाने में तुरंत आपराधिक एफआईआर दर्ज कराएं।