जब कोई व्यक्ति बिना वसीयत (Intestate) लिखे इस दुनिया से चला जाता है, तो उसकी संपत्ति पर सभी कानूनी उत्तराधिकारियों का बराबर अधिकार बनता है। जानिए कानून क्या कहता है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 8 व 9 के तहत क्लास-1 वारिसों को सबसे पहला और बराबर हक मिलता है।
- क्लास-1 वारिसों में मृतक की मां, विधवा पत्नी, सभी बेटे और सभी बेटियां शामिल हैं (पिता क्लास-2 में आते हैं)।
- संपत्ति के सभी क्लास-1 वारिसों में बिल्कुल बराबर-बराबर हिस्से (Equal Shares) बांटे जाते हैं।
- विवाहित बेटी का भी अपने पिता की संपत्ति में बेटों के बिल्कुल बराबर हिस्सा होता है।
1. क्लास-1 उत्तराधिकारियों में हिस्से का उदाहरण
| पारिवारिक सदस्य | वारिसों की श्रेणी | हिस्सा (मान लें 4 सदस्य हैं) |
|---|---|---|
| विधवा पत्नी | क्लास-1 वारिस | 1/4 हिस्सा (25%) |
| मृतक की मां | क्लास-1 वारिस | 1/4 हिस्सा (25%) |
| बेटा | क्लास-1 वारिस | 1/4 हिस्सा (25%) |
| बेटी (विवाहित या अविवाहित) | क्लास-1 वारिस | 1/4 हिस्सा (25%) |
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या मृतक के पिता को क्लास-1 में हिस्सा मिलता है?
A: नहीं, पिता क्लास-2 उत्तराधिकारी होते हैं। यदि कोई भी क्लास-1 वारिस जीवित है, तो पिता को कोई हिस्सा नहीं मिलता।
Q: वरासत (नामांतरण) दर्ज कराने के लिए क्या चाहिए?
A: मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर नकल और सभी वारिसों का शपथ पत्र देकर तहसील में फौती नामांतरण दर्ज होता है।