रजिस्ट्री कराते समय टाइपिस्ट या पक्षों की गलती से प्लॉट नंबर, खसरा नंबर या पड़ोसियों की सीमाएं (Boundaries) गलत दर्ज हो जाना एक गंभीर समस्या बन जाता है। इसे शुद्धिपत्र से सुधारा जाता है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- रजिस्ट्री की मूल गलतियों को सुधारने के लिए सब-रजिस्ट्रार के समक्ष 'रेक्टिफिकेशन डीड' दर्ज कराई जाती है।
- शुद्धिपत्र के लिए विक्रेता और खरीदार दोनों पक्षों का सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में उपस्थित होना अनिवार्य।
- रेक्टिफिकेशन डीड पर पूरी संपत्ति की नई स्टांप ड्यूटी नहीं लगती, केवल मामूली सरकारी शुल्क (₹100-₹500) लगता है।
- यदि विक्रेता आने से मना करे, तो सिविल कोर्ट में धारा 26 Specific Relief Act के तहत मुकदमा करना होता है।
1. रेक्टिफिकेशन डीड से क्या-क्या सुधारा जा सकता है?
- पक्षों के नाम, पिता के नाम या पते की स्पेलिंग मिस्टेक
- खसरा नंबर, खाता संख्या या प्लॉट नंबर में लिपिकीय त्रुटि (Clerical Error)
- पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण की चौहद्दियों (Boundaries) का सही विवरण
- जमीन का सही रकबा या वर्गगज की माप
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जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या विक्रेता के न मिलने पर कोर्ट के जरिए शुद्धि हो सकती है?
A: हां, सिविल जज की अदालत में शुद्धिपत्र (Rectification of Instrument) का वाद दायर कर कोर्ट के आदेश से रिकॉर्ड दुरुस्त कराया जा सकता है।
Q: क्या रेक्टिफिकेशन डीड से पूरी संपत्ति बदली जा सकती है?
A: नहीं, शुद्धिपत्र केवल अनजाने में हुई गलतियों के लिए है; इससे मूल सौदे का स्वरूप या पूरी जमीन नहीं बदली जा सकती।