भारत का सर्वोच्च न्यायालय न केवल संविधान का संरक्षक है, बल्कि आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की अंतिम ढाल भी है। हालिया दिनों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए 10 बड़े फैसलों ने देश की न्यायिक और सामाजिक दिशा को नया बल दिया है।
10 महत्वपूर्ण कानूनी फैसले संक्षेप में
- जमानत नियम है और जेल अपवाद: त्वरित सुनवाई न होने पर आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में बंद नहीं रखा जा सकता।
- अवैध बुलडोजर कार्रवाई पर रोक: न्यायिक प्रक्रिया के बिना किसी का घर या संपत्ति गिराना संविधान के खिलाफ है।
- शादी के वादे पर संबंध: सहमति से बने लंबे रिश्तों के टूटने पर हर मामले को स्वतः बलात्कार नहीं माना जा सकता।
- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की अनिवार्यता: आपराधिक मुकदमों में डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक पुष्टि अनिवार्य है।
- सीनियर सिटीजंस के भरण-पोषण: बुजुर्गों की देखभाल न करने पर बच्चों को दी गई गिफ्ट डीड रद्द करने का अधिकार।
- उपभोक्ता शिकायतों पर समय सीमा: बिल्डरों द्वारा फ्लैट डिलीवरी में देरी पर खरीदार को ब्याज सहित रिफंड का हक।
- निवारक हिरासत की सख्त समीक्षा: सामान्य कानूनों की मौजूदगी में कड़े कानूनों का दुरुपयोग असंवैधानिक।
- सूचना का अधिकार और पारदर्शिता: कॉलेजियम प्रणाली और न्यायिक नियुक्तियों में योग्यता की प्राथमिक भूमिका।
- घरेलू हिंसा से सुरक्षा: साझी गृहस्थी में महिलाओं के रहने के अधिकार का संरक्षण।
- सरकारी नौकरियों में आरक्षण: क्रीमी लेयर की पहचान और सब-क्लासिफिकेशन पर संवैधानिक पीठ का निर्णय।