व्यावसायिक विवादों के समाधान में मध्यस्थता कानून यानी आर्बिट्रेशन एक्ट अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सुप्रीम कोर्ट ने हालिया फैसले में धारा 17 के तहत अंतरिम आदेश पारित करने और उनकी कानूनी वैधता पर एक स्पष्ट मिसाल कायम की है, जिससे कॉर्पोरेट जगत और वकीलों को कार्यप्रणाली में स्पष्टता मिली है।
अदालत के समान शक्तियां और अंतरिम राहत
2015 के संशोधन के बाद धारा 17 के तहत गठित मध्यस्थ न्यायाधिकरण को दीवानी अदालत के समान अंतरिम राहत देने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक न्यायाधिकरण के पास मामला विचाराधीन है, तब तक अदालतों को अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना चाहिए ताकि मध्यस्थता की स्वायत्तता बनी रहे।