भारत की विदेश नीति और कूटनीति: गुटनिरपेक्षता से वैश्विक महाशक्ति बनने तक का सफर: भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, जी20 अध्यक्षता, ग्लोबल साउथ का नेतृत्व और वैश्विक मंचों पर भारत की मजबूत आवाज।
आइए विस्तार से समझें इस महत्वपूर्ण विषय से जुड़ी हर जरूरी जानकारी, कानूनी व वित्तीय नियम और आम नागरिकों के लिए इसके मुख्य फायदे।
गुटनिरपेक्षता से रणनीतिक स्वायत्तता तक
आजादी के बाद भारत ने शीत युद्ध के दौर में किसी गुट में शामिल न होकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखी।
- आज भारत अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और ऊर्जा सुरक्षा के आधार पर वैश्विक संबंध तय करता है।
- रूस, अमेरिका और यूरोप के साथ संतुलित और व्यावहारिक कूटनीति भारत की बड़ी ताकत है।
ग्लोबल साउथ का मजबूत नेतृत्व
भारत ने विकासशील और गरीब देशों की आवाज को विश्व मंच पर मजबूती से उठाया है।
- जी20 की ऐतिहासिक अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थाई सदस्यता दिलवाना भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत थी।
"सजग और जागरूक नागरिक ही एक मजबूत लोकतंत्र की असली नींव होते हैं। अपने मताधिकार और संवैधानिक अधिकारों के बारे में सही जानकारी रखें और इस लेख को शेयर करें।"
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत की विदेश नीति का मुख्य सिद्धांत क्या है?
रणनीतिक स्वायत्तता, संप्रभुता का सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व भारत की विदेश नीति के मूल आधार हैं।
नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी क्या है?
अपने पड़ोसी देशों के साथ विकास, व्यापार और सुरक्षा में प्राथमिक सहयोग देने की नीति नेबरहुड फर्स्ट कहलाती है।