भारत में परिसीमन आयोग क्या है: लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण के नियम: जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण कैसे होता है: परिसीमन आयोग की शक्तियां और प्रक्रिया।
आइए विस्तार से समझें इस महत्वपूर्ण विषय से जुड़ी हर जरूरी जानकारी, कानूनी व वित्तीय नियम और आम नागरिकों के लिए इसके मुख्य फायदे।
परिसीमन आयोग का कार्य और संवैधानिक आधार
संविधान के अनुच्छेद 82 और 170 के अनुसार प्रत्येक नई जनगणना के बाद लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है।
- सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग गठित होता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य समान जनसंख्या पर समान जनप्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
परिसीमन आयोग के आदेशों की सर्वोच्चता
परिसीमन आयोग के आदेशों को देश की किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।
- आयोग के फैसले राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद राजपत्र में प्रकाशित होते ही कानूनी रूप ले लेते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत में अब तक कितने परिसीमन आयोग गठित हो चुके हैं?
भारत में अब तक 4 बार: 1952, 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन आयोग गठित किए जा चुके हैं।
वर्तमान में लोकसभा सीटों की संख्या किस वर्ष तक स्थिर की गई है?
84वें संविधान संशोधन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या को वर्ष 2026 तक फ्रीज किया गया था।