राज्यपाल के संवैधानिक अधिकार और भूमिका: राज्य सरकार और केंद्र के बीच का संतुलन: राज्य के संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल की शक्तियां: मुख्यमंत्री की नियुक्ति, विधानसभा सत्र बुलाना और बिलों को मंजूरी देने के नियम।
आइए विस्तार से समझें इस महत्वपूर्ण विषय से जुड़ी हर जरूरी जानकारी, कानूनी व वित्तीय नियम और आम नागरिकों के लिए इसके मुख्य फायदे।
राज्यपाल की दोहरी भूमिका और संवैधानिक स्थिति
राज्यपाल राज्य के संवैधानिक मुखिया होते हैं और साथ ही केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में संघीय ढांचे का सेतु होते हैं।
- विधानसभा में बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री पद की शपथ राज्यपाल दिलाते हैं।
- विधानसभा से पारित किसी भी बिल पर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ही वह कानून बनता है।
विवेकाधीन शक्तियां और अनुच्छेद 356
त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में राज्यपाल अपने विवेक से सबसे बड़े गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।
- राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है?
भारत के राष्ट्रपति केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर 5 वर्ष के लिए राज्यपाल की नियुक्ति करते हैं।
राज्यपाल बनने के लिए न्यूनतम आयु सीमा क्या है?
राज्यपाल पद का उम्मीदवार बनने के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए।