LIVE
ShayariManch ShayariManch.com
Police & Criminal Law 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,501 Views

FIR बनाम NCR: संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध में अंतर, पुलिस के अधिकार और शिकायत प्रक्रिया

थाने में एफआईआर और एनसीआर में क्या फर्क होता है? मारपीट, गाली-गलौज, चोरी और मोबाइल गुमशुदगी में पुलिस कब मुकदमा दर्ज करती है।

L
Legal & Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
Share:
FIR बनाम NCR: संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध में अंतर, पुलिस के अधिकार और शिकायत प्रक्रिया

जब कोई व्यक्ति थाने जाता है, तो पुलिस कभी एफआईआर लिखती है तो कभी केवल एनसीआर (गैर-संज्ञेय रिपोर्ट) काटकर भेज देती है। इन दोनों में भारी कानूनी अंतर है।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) में सीधे एफआईआर दर्ज होती है और पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है।
  • असंज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offence) में केवल एनसीआर दर्ज होती है और पुलिस कोर्ट के आदेश बिना जांच नहीं कर सकती।
  • हत्या, बलात्कार, लूट, डकैती, गंभीर चोट और धोखाधड़ी संज्ञेय अपराध हैं।
  • साधारण गाली-गलौज, मामूली धक्का-मुक्की और मोबाइल गुमशुदगी असंज्ञेय श्रेणी में आते हैं।

1. एफआईआर और एनसीआर की तुलनात्मक तालिका

मापदंड FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) NCR (असंज्ञेय रिपोर्ट)
अपराध की प्रकृति गंभीर एवं संज्ञेय अपराध हल्के एवं असंज्ञेय अपराध
जांच का अधिकार पुलिस तुरंत बिना कोर्ट अनुमति जांच करती है मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच नहीं हो सकती
गिरफ्तारी की शक्ति पुलिस सीधे बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है बिना अदालती वारंट के गिरफ्तारी नहीं हो सकती
कानूनी धारा धारा 173 BNSS (पुरानी 154 CrPC) धारा 174 BNSS (पुरानी 155 CrPC)
⚖️ कानूनी परामर्श व विशेषज्ञ सहायता (Legal Assistance)
राजस्थान हाई कोर्ट एवं रेवेन्यू कोर्ट विशेषज्ञ

किसी भी कानूनी, दस्तावेजी या जमीनी समस्या के लिए विशेषज्ञ विधिक राय लें

जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: एनसीआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच कैसे शुरू कराएं?

A: आप धारा 174(2) BNSS के तहत मजिस्ट्रेट कोर्ट में अर्जी लगाकर पुलिस को जांच करने और रिपोर्ट पेश करने का आदेश करा सकते हैं।

Q: क्या एफआईआर की कॉपी मुफ्त मिलती है?

A: हां, एफआईआर दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता को थाने से तुरंत एक प्रमाणित कॉपी मुफ्त में पाना उसका कानूनी अधिकार है।

Police & Criminal Law

थाने में FIR दर्ज न करने पर क्या करें? एसपी को शिकायत व कोर्ट इस्तगासा (Section 175(3) BNSS)

अगर थाना प्रभारी आपकी रिपोर्ट लिखने से मना कर दे, तो घबराएं नहीं। ललिता कुमारी जजमेंट, धारा 175(3) BNSS (पुरानी 156(3) CrPC) और ऑनलाइन शिकायत की पूरी प्रक्रिया।

Police & Criminal Law

पुलिस नोटिस मिलने पर क्या करें? धारा 35(3) BNSS / 41A CrPC में गिरफ्तारी से सुरक्षा और कानूनी अधिकार

थाने से पुलिस का नोटिस आने पर डरने की जरूरत नहीं। धारा 35(3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत बिना गिरफ्तारी के बयान दर्ज कराने के नियम और वकील की भूमिका।

Police & Criminal Law

अदालत से समन या वारंट (Summons & Warrants) मिलने पर क्या करें? हाजिरी, बेल और गिरफ्तारी से बचाव

कोर्ट का समन या जमानती/गैर-जमानती वारंट (Bailable/Non-Bailable Warrant) मिलने पर घबराएं नहीं। अदालत में समर्पण, हाजिरी और जमानत की प्रक्रिया।

Police & Criminal Law

ऑनलाइन पुलिस शिकायत और ई-एफआईआर (e-FIR) कैसे दर्ज करें? राज्यवार पुलिस पोर्टल व प्रक्रिया

थाने जाने का झंझट खत्म: मोबाइल चोरी, गुमशुदगी या साइबर अपराध की ऑनलाइन रिपोर्ट कैसे लिखाएं? यूपी कॉप, राजस्थान पुलिस, दिल्ली पुलिस और एमपी ई-एफआईआर पोर्टल गाइड।

Police & Criminal Law

अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) कैसे मिलती है? धारा 482 BNSS / 438 CrPC के नियम व शर्तें

गिरफ्तारी की आशंका होने पर जेल जाने से कैसे बचें? नए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 482 के तहत सेशन कोर्ट व हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लेने की पूरी गाइड।

Police & Criminal Law

रेगुलर बेल (Regular Bail) बनाम अंतरिम जमानत (Interim Bail): जेल से रिहाई की कानूनी प्रक्रिया

गिरफ्तारी के बाद जेल से बाहर कैसे आएं? धारा 480 व 483 BNSS (पुरानी 437 व 439 CrPC) के नियम, बेल बांड (Bail Bond), जमानती और रिहाई की पूरी प्रक्रिया।

कॉपी हो गया!