जब कोई व्यक्ति थाने जाता है, तो पुलिस कभी एफआईआर लिखती है तो कभी केवल एनसीआर (गैर-संज्ञेय रिपोर्ट) काटकर भेज देती है। इन दोनों में भारी कानूनी अंतर है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) में सीधे एफआईआर दर्ज होती है और पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है।
- असंज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offence) में केवल एनसीआर दर्ज होती है और पुलिस कोर्ट के आदेश बिना जांच नहीं कर सकती।
- हत्या, बलात्कार, लूट, डकैती, गंभीर चोट और धोखाधड़ी संज्ञेय अपराध हैं।
- साधारण गाली-गलौज, मामूली धक्का-मुक्की और मोबाइल गुमशुदगी असंज्ञेय श्रेणी में आते हैं।
1. एफआईआर और एनसीआर की तुलनात्मक तालिका
| मापदंड | FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) | NCR (असंज्ञेय रिपोर्ट) |
|---|---|---|
| अपराध की प्रकृति | गंभीर एवं संज्ञेय अपराध | हल्के एवं असंज्ञेय अपराध |
| जांच का अधिकार | पुलिस तुरंत बिना कोर्ट अनुमति जांच करती है | मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच नहीं हो सकती |
| गिरफ्तारी की शक्ति | पुलिस सीधे बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है | बिना अदालती वारंट के गिरफ्तारी नहीं हो सकती |
| कानूनी धारा | धारा 173 BNSS (पुरानी 154 CrPC) | धारा 174 BNSS (पुरानी 155 CrPC) |
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: एनसीआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच कैसे शुरू कराएं?
A: आप धारा 174(2) BNSS के तहत मजिस्ट्रेट कोर्ट में अर्जी लगाकर पुलिस को जांच करने और रिपोर्ट पेश करने का आदेश करा सकते हैं।
Q: क्या एफआईआर की कॉपी मुफ्त मिलती है?
A: हां, एफआईआर दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता को थाने से तुरंत एक प्रमाणित कॉपी मुफ्त में पाना उसका कानूनी अधिकार है।