अदालत किसी व्यक्ति को गवाह के रूप में या आरोपी के रूप में पेश होने के लिए समन जारी करती है। समन की अनदेखी करने पर कोर्ट वारंट जारी कर देती है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- समन केवल कोर्ट में उपस्थिति का आदेश है, यह गिरफ्तारी का आदेश नहीं होता।
- समन मिलने पर तय तारीख पर स्वयं या अपने वकील के माध्यम से अदालत में हाजिरी दर्ज कराएं।
- जमानती वारंट (Bailable Warrant) में थानेदार या कोर्ट में मुचलका भरकर तुरंत राहत मिल जाती है।
- गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी होने पर तुरंत वकील के जरिए रिकॉल एप्लीकेशन (Recall Application) लगाएं।
1. समन और वारंट में कानूनी अंतर
| प्रकार | उद्देश्य | पुलिस का अधिकार | कानूनी उपाय |
|---|---|---|---|
| कोर्ट समन (Summons) | अदालत में बयान या साक्ष्य हेतु बुलाना | गिरफ्तार नहीं कर सकती | तय तारीख पर वकील के साथ हाजिर हों |
| जमानती वारंट (BW) | सुरक्षा के साथ पेशी सुनिश्चित करना | बेल बांड भरवाकर रिहा कर देगी | जमानती पेश कर बेल बांड भरें |
| गैर-जमानती वारंट (NBW) | सीधे कस्टडी में लेकर कोर्ट में पेश करना | सीधे गिरफ्तार कर कोर्ट पेश करेगी | वारंट निरस्तीकरण (Recall) अर्जी लगाएं |
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: अगर समन की तारीख पर न जाएं तो क्या होगा?
A: अदालत आपके खिलाफ जमानती और उसके बाद गैर-जमानती वारंट जारी कर सकती है और कुर्की की कार्रवाई शुरू हो सकती है।
Q: वारंट रिकॉल कराने में कितना समय लगता है?
A: वकील के जरिए उसी दिन कोर्ट में बीमारी या अपरिहार्य कारण का हलफनामा देकर वारंट रिकॉल कराया जा सकता है।