सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 'ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश' फैसले के अनुसार किसी भी संज्ञेय (Cognizable) अपराध में एफआईआर दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कानूनी दायित्व है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- थानेदार द्वारा एफआईआर न लिखने पर धारा 173(4) BNSS के तहत जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को पंजीकृत डाक से शिकायत।
- एसपी द्वारा कार्रवाई न करने पर धारा 175(3) BNSS के तहत सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में इस्तगासा (Court Complaint)।
- मजिस्ट्रेट पुलिस को एफआईआर दर्ज कर 24 घंटे में जांच शुरू करने का सख्त आदेश दे सकता है।
- एफआईआर दर्ज न करने वाले पुलिस अधिकारी पर BNS की धारा 199 के तहत मुकदमा चल सकता है।
1. एफआईआर दर्ज कराने के 3-चरणबद्ध कानूनी कदम
| चरण | अथॉरिटी | कानूनी प्रक्रिया | समय सीमा |
|---|---|---|---|
| पहला चरण | थाना प्रभारी (SHO) | लिखित शिकायत देकर रिसीविंग (GD नंबर) लें | तत्काल |
| दूसरा चरण | पुलिस अधीक्षक (SP/DCP) | रजिस्टर्ड डाक / स्पीड पोस्ट द्वारा लिखित शिकायत भेजें | 3 से 7 दिन |
| तीसरा चरण | न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट | धारा 175(3) BNSS के तहत वकील के जरिए प्रार्थना पत्र | कोर्ट हियरिंग पर |
2. कोर्ट में इस्तगासा लगाते समय क्या ध्यान रखें?
- थाने में दी गई शिकायत की मूल प्रति और स्पीड पोस्ट की रसीद साथ लगाएं।
- घटना का सत्य और सटीक विवरण लिखें, कोई भी झूठा आरोप न जोड़ें।
- शपथ पत्र (Affidavit) अनिवार्य रूप से संलग्न करें कि पहले कोई अन्य मुकदमा इस विषय पर लंबित नहीं है।
किसी भी कानूनी, दस्तावेजी या जमीनी समस्या के लिए विशेषज्ञ विधिक राय लें
जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या ई-एफआईआर (Online FIR) भी दर्ज कराई जा सकती है?
A: हां, चोरी, गुमशुदगी या साइबर अपराधों के लिए अधिकांश राज्यों के पुलिस पोर्टल पर ऑनलाइन ई-एफआईआर की सुविधा उपलब्ध है।
Q: कोर्ट इस्तगासा में कितना समय लगता है?
A: मजिस्ट्रेट आमतौर पर पहली या दूसरी पेशी में पुलिस से एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगता है और संज्ञेय अपराध पाए जाने पर एफआईआर का आदेश जारी करता है।