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Police & Criminal Law 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,502 Views

पुलिस नोटिस मिलने पर क्या करें? धारा 35(3) BNSS / 41A CrPC में गिरफ्तारी से सुरक्षा और कानूनी अधिकार

थाने से पुलिस का नोटिस आने पर डरने की जरूरत नहीं। धारा 35(3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत बिना गिरफ्तारी के बयान दर्ज कराने के नियम और वकील की भूमिका।

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Legal & Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
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पुलिस नोटिस मिलने पर क्या करें? धारा 35(3) BNSS / 41A CrPC में गिरफ्तारी से सुरक्षा और कानूनी अधिकार

अक्सर लोगों को लगता है कि पुलिस का नोटिस आने का मतलब तुरंत जेल जाना है, जबकि वास्तव में यह नोटिस गिरफ्तारी से बचाने और जांच में सहयोग के लिए दिया जाता है।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • 7 साल से कम सजा वाले अपराधों में सीधे गिरफ्तारी वर्जित है (अरणेश कुमार जजमेंट)।
  • धारा 35(3) BNSS (पुरानी 41A CrPC) के तहत पुलिस जांच में हाजिर होने का नोटिस देती है।
  • नोटिस की शर्तों का पालन करने पर पुलिस आपको बिना कोर्ट की पूर्व अनुमति के गिरफ्तार नहीं कर सकती।
  • पूछताछ के दौरान अपने वकील को साथ रखने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 22(1) में प्रदत्त है।

1. पुलिस नोटिस मिलने पर क्या करें और क्या न करें?

✅ नोटिस की तारीख पर उपस्थित हों

नोटिस को नजरअंदाज न करें। तय समय पर थाने पहुंचकर अपनी उपस्थिति लिखित रजिस्टर में दर्ज कराएं।

✅ वकील के साथ परामर्श करें

थाने जाने से पहले अपने वकील से एफआईआर की कॉपी और आरोपों की गंभीरता का विश्लेषण कराएं।

❌ कोई खाली कागज साइन न करें

किसी भी कोरे कागज या ऐसे बयान पर हस्ताक्षर न करें जो आपने स्वेच्छा से नहीं दिया हो।

✅ अग्रिम जमानत का विकल्प

यदि गिरफ्तारी की वास्तविक आशंका है, तो तुरंत सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) लगाएं।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: अगर पुलिस नोटिस का पालन न किया जाए तो क्या होगा?

A: नोटिस की अनदेखी करने पर पुलिस कोर्ट से गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करा सकती है और सीधे गिरफ्तारी का अधिकार पा लेती है।

Q: क्या पुलिस नोटिस के बाद भी तुरंत गिरफ्तार कर सकती है?

A: नहीं, जब तक आप जांच में सहयोग कर रहे हैं, पुलिस बिना केस डायरी में विशेष कारण दर्ज किए गिरफ्तार नहीं कर सकती।

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