जब एक पक्ष अलग होना चाहता है लेकिन दूसरा पक्ष तलाक देने से इनकार कर देता है, तो पीड़ित पक्ष को एकतरफा तलाक (Contested Divorce) का मुकदमा दाखिल करना पड़ता है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत क्रूरता (Cruelty), परित्याग (Desertion) या मानसिक अस्वस्थता मुख्य आधार।
- मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) में गाली-गलौज, झूठे मुकदमे दर्ज कराना और माता-पिता से अलग रहने का अनुचित दबाव शामिल।
- लगातार 2 वर्ष या अधिक समय तक बिना किसी उचित कारण के छोड़कर चले जाना (Desertion) वैध आधार है।
- कोर्ट में गवाहों की गवाही, क्रॉस-एग्जामिनेशन और साक्ष्यों के आधार पर जज तलाक की डिक्री पारित करते हैं।
1. एकतरफा तलाक के प्रमुख कानूनी आधार
- क्रूरता (शारीरिक हिंसा या मानसिक प्रताड़ना व अपमान)
- परित्याग (कम से कम 2 साल से वैवाहिक संबंधों का परित्याग)
- व्यभिचार (Adultery - विवाह के बाहर अवैध शारीरिक संबंध)
- धर्मांतरण या असाध्य संक्रामक/मानसिक बीमारी
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: एकतरफा तलाक में कितना समय लगता है?
A: तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर फैमिली कोर्ट में आमतौर पर 2 से 4 साल का समय लग सकता है।
Q: केस के दौरान क्या पत्नी को खर्चा देना होगा?
A: हां, धारा 24 हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कोर्ट मुकदमे के दौरान अंतरिम भरण-पोषण और केस लड़ने का खर्च पति को देने का आदेश दे सकती है।