जब पति और पत्नी के बीच सुलह की कोई गुंजाइश न बचे, तो वर्षों तक कोर्ट में लड़ने के बजाय आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce) लेना दोनों के भविष्य के लिए सबसे बेहतर विकल्प है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13B (या विशेष विवाह अधिनियम धारा 28) के तहत संयुक्त याचिका।
- कम से कम 1 वर्ष से अलग रहने (Living Separately) का प्रमाण पत्र आवश्यक।
- सुप्रीम कोर्ट के 'अमरदीप सिंह' फैसले के अनुसार 6 महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि (Cooling-off Period) को माफ कराया जा सकता है।
- स्त्रीधन, गुजारा भत्ता (Alimony) और बच्चों की कस्टडी का एकमुश्त अंतिम फैसला पहले ही लिखित में तय हो जाता है।
1. आपसी सहमति तलाक के 2 मोशन
प्रथम मोशन (First Motion)
दोनों पक्ष संयुक्त हलफनामे के साथ फैमिली कोर्ट में बयान दर्ज कराते हैं और समझौते की शर्तें कोर्ट रिकॉर्ड पर आती हैं।
द्वितीय मोशन (Second Motion)
नियमतः 6 महीने बाद (या वेवर अर्जी मंजूर होने पर 1 सप्ताह में) अंतिम बयान दर्ज होते हैं और कोर्ट तलाक की डिक्री जारी करती है।
किसी भी कानूनी, दस्तावेजी या जमीनी समस्या के लिए विशेषज्ञ विधिक राय लें
जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या प्रथम मोशन के बाद कोई पक्ष सहमति वापस ले सकता है?
A: हां, दूसरे मोशन से पहले कोई भी पक्ष अपनी सहमति वापस ले सकता है, जिससे आपसी सहमति का केस स्वतः समाप्त हो जाता है।
Q: कुल कितना समय और खर्चा लगता है?
A: वेवर एप्लीकेशन मंजूर होने पर 1 से 2 महीने में तलाक की डिक्री मिल जाती है और कोर्ट फीस मात्र नाममात्र की होती है।