LIVE
ShayariManch ShayariManch.com
Family & Marriage 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,501 Views

कोर्ट मैरिज (Court Marriage) प्रक्रिया और फीस: स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के नियम, 30 दिन का नोटिस व सर्टिफिकेट

कोर्ट मैरिज कैसे करें? लड़के-लड़की की उम्र सीमा, जरूरी दस्तावेज, 30 दिन का कानूनी नोटिस, 3 गवाहों की अनिवार्यता और मैरिज सर्टिफिकेट की वैधता।

L
Legal & Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
Share:
कोर्ट मैरिज (Court Marriage) प्रक्रिया और फीस: स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के नियम, 30 दिन का नोटिस व सर्टिफिकेट

विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act 1954) के तहत किसी भी धर्म या जाति के बालिग स्त्री-पुरुष बिना किसी धार्मिक रीति-रिवाज के कानूनी विवाह कर सकते हैं।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • विवाह हेतु लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना अनिवार्य।
  • मैरिज ऑफिसर के कार्यालय में विवाह की सूचना (Notice of Intended Marriage) दाखिल करना।
  • कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर 30 दिन का सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित किया जाता है।
  • 30 दिन में कोई वैध आपत्ति न आने पर 3 गवाहों की मौजूदगी में विवाह संपन्न होता है और कानूनी प्रमाण पत्र मिलता है।

1. कोर्ट मैरिज के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • वर और वधू दोनों का आयु प्रमाण (10वीं की मार्कशीट, जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट)
  • निवास प्रमाण पत्र (आधार कार्ड, वोटर आईडी या रेंट एग्रीमेंट)
  • पासपोर्ट साइज 4-4 रंगीन फोटोग्राफ
  • 3 वयस्क गवाहों के पहचान पत्र और पते के दस्तावेज
⚖️ कानूनी परामर्श व विशेषज्ञ सहायता (Legal Assistance)
राजस्थान हाई कोर्ट एवं रेवेन्यू कोर्ट विशेषज्ञ

किसी भी कानूनी, दस्तावेजी या जमीनी समस्या के लिए विशेषज्ञ विधिक राय लें

जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: क्या कोर्ट मैरिज की सूचना माता-पिता के घर भेजी जाती है?

A: कई उच्च न्यायालयों (जैसे इलाहाबाद और दिल्ली हाईकोर्ट) ने फैसला दिया है कि नोटिस घर भेजना अनिवार्य नहीं है, यह केवल नोटिस बोर्ड पर लगाया जाता है।

Q: क्या कोर्ट मैरिज के बाद पुलिस सुरक्षा मिल सकती है?

A: हां, यदि परिवारों से जान-माल का खतरा हो, तो युगल उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका लगाकर तत्काल पुलिस सुरक्षा (Protection Order) ले सकता है।

Family & Marriage

पारिवारिक विवाद और भरण-पोषण: धारा 144 BNSS (पुरानी 125 CrPC) के तहत पत्नी, बच्चे और बुजुर्गों का अधिकार

गुजारा भत्ता के नए कानूनी नियम: बीएनएसएस धारा 144, अंतरिम मेंटेनेंस (Interim Maintenance), आय का शपथ पत्र और वृद्ध माता-पिता के भरण-पोषण के अधिकार।

Family & Marriage

स्त्रीधन (Stridhan) और ससुराल की संपत्ति में बहू का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट की नई कानूनी गाइडलाइन

शादी में मिले गहनों और उपहारों पर किसका मालिकाना हक होता है? स्त्रीधन की कानूनी सुरक्षा, ससुराल की संपत्ति में बहू के अधिकार और तलाक पर वापसी के नियम।

Family & Marriage

आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce): 6 महीने की कूलिंग-ऑफ छूट, खर्चा व त्वरित डिक्री

पति-पत्नी यदि दोनों अलग होना चाहें तो सबसे तेज और सम्मानजनक तरीका: हिंदू विवाह अधिनियम धारा 13B, प्रथम व द्वितीय मोशन और भरण-पोषण का अंतिम समझौता।

Family & Marriage

एकतरफा तलाक (Contested Divorce): क्रूरता, परित्याग व व्यभिचार के आधार पर तलाक लेने की कोर्ट प्रक्रिया

यदि जीवनसाथी तलाक देने से मना करे तो एकतरफा तलाक कैसे लें? धारा 13(1) हिंदू मैरिज एक्ट के वैध आधार, सबूत जुटाना और फैमिली कोर्ट में मुकदमे की पैरवी।

Family & Marriage

बच्चों की कस्टडी (Child Custody): मां बनाम पिता के अधिकार और 'बच्चे का कल्याण' (Welfare of Child)

तलाक या विवाद के समय बच्चे की कस्टडी किसे मिलती है? 5 साल से कम उम्र के बच्चे का नियम, पिता के गार्जियनशिप अधिकार और विजिटेशन राइट्स (मुलाकात का हक)।

Family & Marriage

घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 (Domestic Violence Act): साझा घर में रहने का हक, संरक्षण आदेश व हर्जाना

पति या ससुराल वालों द्वारा शारीरिक, मानसिक या आर्थिक प्रताड़ना पर महिला के अधिकार: धारा 12 DV Act की अर्जी, सुरक्षा अधिकारी (PO) और अंतरिम भरण-पोषण।

कॉपी हो गया!