शादी के समय और उसके बाद महिला को मायके या ससुराल से मिले सभी उपहार, गहने और नकदी कानूनन 'स्त्रीधन' कहलाते हैं। इस पर केवल और केवल महिला का 100% अधिकार होता है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- स्त्रीधन पर पति या सास-ससुर का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता, वे केवल इसके अमानतदार (Trustee) होते हैं।
- स्त्रीधन वापस मांगने पर न लौटाना BNS धारा 316 (आपराधिक न्यासभंग / Breach of Trust) का अपराध है।
- ससुर की स्वअर्जित संपत्ति में बहू का सीधे कोई मालिकाना हक नहीं होता, लेकिन उसे साझा घर में रहने का अधिकार है।
- पति की मृत्यु होने पर ससुर की पैतृक संपत्ति में विधवा बहू और उसके बच्चों का पूरा हिस्सा बनता है।
1. स्त्रीधन के दायरे में क्या-क्या आता है?
- शादी से पहले, शादी के समय या विदाई पर मिले सभी सोने-चांदी के आभूषण
- महिला के नाम पर खरीदी गई एफडी, बैंक खाता, कपड़े और वाहन
- बच्चे के जन्म पर मायके और रिश्तेदारों से मिले नकदी और उपहार
- महिला द्वारा स्वयं की नौकरी या व्यवसाय से कमाई गई निजी संपत्ति
किसी भी कानूनी, दस्तावेजी या जमीनी समस्या के लिए विशेषज्ञ विधिक राय लें
जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: ससुराल वाले यदि गहने न लौटाएं तो क्या करें?
A: महिला घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 19(8) या बीएनएस धारा 316 के तहत अदालत में अर्जी लगाकर पुलिस की मदद से अपना पूरा स्त्रीधन वापस ले सकती है।
Q: क्या घरेलू हिंसा कानून के तहत साझा घर में रहने का हक मिलता है?
A: हां, सुप्रीम कोर्ट के 'सतीश चंदर आहूजा' फैसले के अनुसार बहू को ससुराल के साझा घर (Shared Household) से जबरन नहीं निकाला जा सकता।