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Family & Marriage 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,501 Views

घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 (Domestic Violence Act): साझा घर में रहने का हक, संरक्षण आदेश व हर्जाना

पति या ससुराल वालों द्वारा शारीरिक, मानसिक या आर्थिक प्रताड़ना पर महिला के अधिकार: धारा 12 DV Act की अर्जी, सुरक्षा अधिकारी (PO) और अंतरिम भरण-पोषण।

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Legal & Public Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
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घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 (Domestic Violence Act): साझा घर में रहने का हक, संरक्षण आदेश व हर्जाना

घरेलू हिंसा केवल मारपीट तक सीमित नहीं है; ताने मारना, खर्चे के पैसे न देना, मायके जाने से रोकना या घर से बाहर निकालने की धमकी देना भी कानूनन अपराध है।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • धारा 19 के तहत साझा घर में रहने का अधिकार (Right to Residence); महिला को ससुराल से नहीं निकाला जा सकता।
  • धारा 18 के तहत संरक्षण आदेश (Protection Order); आरोपी पति या ससुराल वाले महिला के पास आने या बात करने से प्रतिबंधित।
  • धारा 20 व 22 के तहत तत्काल मासिक खर्च और मानसिक प्रताड़ना के लिए लाखों रुपये का एकमुश्त मुआवजा।
  • केस दाखिल होने के 3 दिन में पहली सुनवाई और 60 दिनों में निस्तारण का वैधानिक नियम।

1. घरेलू हिंसा के 4 रूप जिनकी शिकायत हो सकती है

1. शारीरिक हिंसा

मारपीट, धक्का-मुक्की, चोट पहुंचाना या शारीरिक कष्ट देना।

2. मानसिक व भावनात्मक हिंसा

संतान न होने पर ताने मारना, गाली-गलौज, चरित्र पर झूठे लांछन लगाना या धमकी देना।

3. आर्थिक हिंसा

घरेलू खर्च के लिए पैसे न देना, नौकरी करने से रोकना या महिला के वेतन को जबरन छीन लेना।

4. लैंगिक हिंसा

महिला की मर्जी के बिना जबरन संबंध बनाना या उसकी गरिमा का अपमान करना।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: घरेलू हिंसा की शिकायत कहां दर्ज कराएं?

A: जिले के संरक्षण अधिकारी (Protection Officer), महिला थाने या सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में धारा 12 के तहत।

Q: यदि ससुराल वाले आदेश के बाद भी परेशान करें तो?

A: संरक्षण आदेश का उल्लंघन करने पर धारा 31 के तहत पति/ससुराल वालों को तुरंत 1 साल की जेल और गैर-जमानती वारंट होता है।

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