घरेलू हिंसा केवल मारपीट तक सीमित नहीं है; ताने मारना, खर्चे के पैसे न देना, मायके जाने से रोकना या घर से बाहर निकालने की धमकी देना भी कानूनन अपराध है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- धारा 19 के तहत साझा घर में रहने का अधिकार (Right to Residence); महिला को ससुराल से नहीं निकाला जा सकता।
- धारा 18 के तहत संरक्षण आदेश (Protection Order); आरोपी पति या ससुराल वाले महिला के पास आने या बात करने से प्रतिबंधित।
- धारा 20 व 22 के तहत तत्काल मासिक खर्च और मानसिक प्रताड़ना के लिए लाखों रुपये का एकमुश्त मुआवजा।
- केस दाखिल होने के 3 दिन में पहली सुनवाई और 60 दिनों में निस्तारण का वैधानिक नियम।
1. घरेलू हिंसा के 4 रूप जिनकी शिकायत हो सकती है
1. शारीरिक हिंसा
मारपीट, धक्का-मुक्की, चोट पहुंचाना या शारीरिक कष्ट देना।
2. मानसिक व भावनात्मक हिंसा
संतान न होने पर ताने मारना, गाली-गलौज, चरित्र पर झूठे लांछन लगाना या धमकी देना।
3. आर्थिक हिंसा
घरेलू खर्च के लिए पैसे न देना, नौकरी करने से रोकना या महिला के वेतन को जबरन छीन लेना।
4. लैंगिक हिंसा
महिला की मर्जी के बिना जबरन संबंध बनाना या उसकी गरिमा का अपमान करना।
किसी भी कानूनी, दस्तावेजी या जमीनी समस्या के लिए विशेषज्ञ विधिक राय लें
जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: घरेलू हिंसा की शिकायत कहां दर्ज कराएं?
A: जिले के संरक्षण अधिकारी (Protection Officer), महिला थाने या सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में धारा 12 के तहत।
Q: यदि ससुराल वाले आदेश के बाद भी परेशान करें तो?
A: संरक्षण आदेश का उल्लंघन करने पर धारा 31 के तहत पति/ससुराल वालों को तुरंत 1 साल की जेल और गैर-जमानती वारंट होता है।