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Family & Marriage 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,501 Views

पारिवारिक विवाद और भरण-पोषण: धारा 144 BNSS (पुरानी 125 CrPC) के तहत पत्नी, बच्चे और बुजुर्गों का अधिकार

गुजारा भत्ता के नए कानूनी नियम: बीएनएसएस धारा 144, अंतरिम मेंटेनेंस (Interim Maintenance), आय का शपथ पत्र और वृद्ध माता-पिता के भरण-पोषण के अधिकार।

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Legal & Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
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पारिवारिक विवाद और भरण-पोषण: धारा 144 BNSS (पुरानी 125 CrPC) के तहत पत्नी, बच्चे और बुजुर्गों का अधिकार

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 (पुरानी 125 CrPC) पीड़ित पत्नी, नाबालिग बच्चों और असहाय बुजुर्ग माता-पिता को भुखमरी और बेसहारा होने से बचाने का एक सामाजिक कानून है।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • पति की आर्थिक हैसियत और जीवन स्तर के अनुसार अदालत अंतरिम और अंतिम भरण-पोषण तय करती है।
  • सुप्रीम कोर्ट के 'रजनेश बनाम नेहा' फैसले के अनुसार दोनों पक्षों को अपनी संपत्ति और आय का विस्तृत शपथ पत्र (Affidavit of Assets) देना अनिवार्य।
  • केस दाखिल होने के 60 दिनों के भीतर अंतरिम मेंटेनेंस (Interim Maintenance) का फैसला करने का नियम।
  • बुजुर्ग माता-पिता भी अपने सक्षम बेटे या बेटी से भरण-पोषण का कानूनी दावा कर सकते हैं।

1. भरण-पोषण तय करते समय कोर्ट क्या देखती है?

  • पति की वास्तविक आय, व्यापार, बैंक बैलेंस और अचल संपत्ति
  • पत्नी की अपनी आय और क्या वह कमाने में सक्षम है
  • बच्चों की स्कूल फीस, ट्यूशन, स्वास्थ्य और रहने का खर्च
  • पति के ऊपर अन्य आश्रितों (वृद्ध माता-पिता) की जिम्मेदारी
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: भरण-पोषण न देने पर क्या जेल हो सकती है?

A: हां, अदालत के आदेश के बाद भी गुजारा भत्ता न चुकाने पर रिकवरी वारंट जारी होता है और प्रत्येक डिफ़ॉल्ट महीने के लिए जेल की सजा हो सकती है।

Q: क्या काम करने वाली (Working) पत्नी को भी मेंटेनेंस मिल सकता है?

A: यदि पत्नी की आय पति के जीवन स्तर की तुलना में कम है, तो कोर्ट जीवन स्तर की समानता बनाए रखने के लिए अंतर राशि का भरण-पोषण दिला सकती है।

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