जब पुलिस किसी आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत (Jail) में भेज देती है, तो उसे रिहा कराने के लिए अदालत में रेगुलर बेल लगानी होती है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- मजिस्ट्रेट कोर्ट में धारा 480 BNSS और सेशन कोर्ट/हाईकोर्ट में धारा 483 BNSS के तहत रेगुलर बेल।
- अंतरिम जमानत (Interim Bail) नियमित जमानत पर फैसला आने तक या किसी बीमारी/इमरजेंसी के लिए थोड़े समय हेतु मिलती है।
- डिफ़ॉल्ट बेल (Default Bail - धारा 187 BNSS): 60 या 90 दिन में चार्जशीट दाखिल न होने पर आरोपी का बिना शर्त रिहाई का मौलिक अधिकार।
- कोर्ट द्वारा जमानत मंजूर होने पर स्थानीय जमानती (Surety) और मुचलका भरकर जेल से रिहाई परवाना जारी होता है।
1. रेगुलर और अंतरिम जमानत में अंतर
| मापदंड | रेगुलर बेल (Regular Bail) | अंतरिम जमानत (Interim Bail) |
|---|---|---|
| प्रकृति | स्थायी जमानत (मुकदमे की समाप्ति तक) | अस्थायी (कुछ दिनों या हफ्तों के लिए) |
| उद्देश्य | जेल से पूर्ण रिहाई | मेडिकल इमरजेंसी, परीक्षा या रेगुलर बेल पेंडिंग होने पर |
| रद्द होने का खतरा | शर्तें न तोड़ने पर बनी रहती है | तय समय सीमा पूरी होते ही वापस सरेंडर करना होता है |
| अधिकार क्षेत्र | मजिस्ट्रेट, सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट | सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट |
किसी भी कानूनी, दस्तावेजी या जमीनी समस्या के लिए विशेषज्ञ विधिक राय लें
जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: जमानती (Surety) के लिए क्या दस्तावेज चाहिए?
A: जमानती का आधार कार्ड, दो पासपोर्ट साइज फोटो, स्थानीय निवास प्रमाण और संपत्ति दस्तावेज (जैसे आरसी या जमाबंदी नकल)।
Q: जमानत खारिज होने पर कितने दिन बाद दोबारा अर्जी लगा सकते हैं?
A: चार्जशीट पेश होने या नए तथ्य सामने आने पर किसी भी समय उच्च न्यायालय में नई जमानत अर्जी लगाई जा सकती है।